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हे भोलेनाथ ! जय शिवशंकर!!
दीन हीन सी लगती  आषाढ़ी शाम
दो मुर्दों का समागम
पानी बहता ही जाए
पुकार रहा हूं मैं
बाबा बैजू से बुलावा(ग्रामीण भाषा में एक रचना)
दिल आ जाता है
करैला ने पूछा नीम से,
एक पेड़ मां के नाम,खुशियों की नई पहल
जहाँ तक धुंध दिखता है
जब प्यार हुआ उसे पिंजरे से
संकल्प शक्ति
वृक्ष मेरा परिवार ,
साथी
परिवार
श्री कृष्ण नेह सुरभि,श्री मद्भागवत में
पुरोहित
चूड़ियों की खनक में,नारीत्व की परिभाषा
सुहाने बादलों की छत