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जन्ने देखS दुनिया में अब पूछ न हे इंसान के l
वासंती रंग में रँगी धरती ढूँढती
बसन्त
"हर बात के लफ्ज़ नहीं होते हैं"
जिन्दगी की धूप में
"क्या हूॅ मैं"
"जिंदगी की करुणा"
बस खेल -खिलौने सा जीवन !!
"अनपढ़ मोहब्बत"
वो मिलने के किस्से ,
निज चंदा की चांदनी मैं
कितना साफ़ई से
रिश्तों के उलझे तार
काश!तुम हमें उतना ही समझ लेते
मगही बोलS !
विकसित भारत
मनमरजिया
देख कर हालात मुश्किल, घबरायें क्यों,
जीवन में भला बुरा जो भी दिन आता है ।
कौन है अज्ञात यहाँ, ज्ञात सबको कीजिये,