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जब से हमने सच को सच कहना सीखा है
राखी का इतिहास, स्नेह-प्रेम-रक्षा का उजास
रक्षाबंधन
समानता का अधिकार
बदल गया इंसान
देख नखरे अब ईख नंदिनी के
सावन का रुद्राभिषेक
जब सत्य चले निर्भय पथ पर, जीत बने सदा यशगान
महिलाओं से ही घर है समाज है।
हर उपमा भी निखर जाती, तुम्हारे नाम के साथ
सावन चतुर्थ सोमवार, शिव स्नेहिल कृपा-वृष्टि अपार
सावन मास का सोमवार
"सुख का अंतःस्रोत"
"अंतःसलिला"
व्यक्ति नहीं, वक्त होता है कमजोर
इस बार की राखी सूनी है
जो है शेष, वही है विशेष
बातें क्या होती है
रक्षा बंधन
"आत्म ही अमृत"