कल अपना होगा मैं तो भूल गया पूर्व की घटनाएं। न कोई अपना था और न कोई पराया।। जब भी याद आयेगा तो अतीत…
Read more »गरीबी अरुण दिव्यांश जब देखा बच्चा मैल कुचैल , जा पूछा जीवन करीबी से । कैसा जीवन का अभिशाप , शिक्षा …
Read more »तुम प्रेम का मानक, तुम ही प्रेम की इकाई हो कुमार महेंद्र इस सृष्टि के कण-कण में जो, प्रेम-सुधा बन छ…
Read more »लोहार्गल परिक्रमा, लोक आस्था का शिखर कुमार महेंद्र शेखावाटी का हरिद्वार-सा, लोहार्गल आकर्षण अनुपम। …
Read more »कुंडी डॉ अवधेश कुमार अवध मैं तुम्हारे दिल की कुंडी खड़खडाऊं, तुम जगो या ना जगो ये कौन जाने! घर में …
Read more »हृदय के प्रेम-सरोवर में, छवि तुम्हारी उतर रही कुमार महेंद्र हृदय के पावन मौन में, कोई मृदुल राग जग …
Read more »बेटा बना पिता तो... संजय जैन फूलों से खूब सूरत कोई नही। सागर से गहरा कोई नही। अब क्या तारीफ करू पित…
Read more »"प्रज्ञा का विस्तृत पथ" पंकज शर्मा मन की चंचल वृत्तियाँ, और शून्य का पार, बीच म…
Read more »जाने तुमने क्या कर डाला दर्पण से सम्बन्ध बढ़ गया तन से चुनरी लगी खिसकने पैरों में कम्पन बढ़ गया। मन…
Read more »साक्षरता अरुण दिव्यांश राष्ट्र की साक्षरता योजना , सफलीभूत हम बनाऍंगे । ना से तो यह है हाॅं भला , स…
Read more »(विश्व साक्षरता दिवस — 2026) साक्षरता के संग, हर्ष उल्लास उमंग कुमार महेंद्र अज्ञान का अंधियारा छूट…
Read more »राज करोगें संजय जैन राही मनवा सुन ले मेरी। बात पते की तू एक। खुलकर बोलो बातें दिलकी। अपने हक के लिए…
Read more »शब्दों का संसार रचना डॉ अनमोल कुमार शब्द *रचे* जाते हैं, शब्द *गढ़े* जाते हैं, शब्द *मढ़े* जाते हैं…
Read more »हिन्दी हमारी आत्मा है रचना - डॉ अनमोल कुमार हिन्दी हमारी आत्मा है, हिन्दी हमारा मान है। हिन्दी से ह…
Read more »साथ तेरा मिले तो प्रणय के प्रसून खिले कुमार महेंद्र मौन थी हृदय-रागिनी, तुमने छेड़े गीत। सूनी थीं ज…
Read more »सकारात्मकता का महत्व रचना डॉ अनमोल कुमार नकारात्मक सोच से कुछ नहीं होता, अंधेरे में दीया खुद नहीं ज…
Read more »रिश्ता गहरा है संजय जैन प्यार से प्यार को जीतो। दिल से इजहार करो। स्नेह प्रेम आत्मीयता से। स्वयं…
Read more »आ गईल लूट के खजाना अरुण दिव्यांश आ गईल लूट के खजाना , बाढ़ भईल बढ़िया बहाना । चमचा उपनेता दलाल स…
Read more »कृष्ण का मन डोला प्यारी औ प्यारी मईया, कहते है कृष्ण मुरारी। क्या, राधा से कर दो सगाई , मेरी राधा स…
Read more »मैं खोया हूँ तुम्हारे वस्ल में कुमार महेंद्र जैसे कोई सरिता, सिंधु में समाए। जैसे मौन अधरों पर, गीत…
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कल अपना होगा मैं तो भूल गया पूर्व की घटनाएं। न कोई अपना था और न कोई पराया।। जब भी याद आयेगा तो अतीत…
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