काल के शिखंड पर,संकल्प साधना अखंड कर कुमार महेंद्र अर्जुन सी लक्ष्य उपासना, सर्वस्व अर्पण तर्पण । अ…
Read more »पर्यटन , देशाटन अरुण दिव्यांश पर्यटन दिलवालों पैसेवालों का , चोरों का है और चाण्डालों का । गरीबों ह…
Read more »"जलदर्पण" पंकज शर्मा शरद की सांझ, धीरे-धीरे वन की पर्ण-लता पर एक म्लान दीप्ति बिखेरती हुई…
Read more »दिल लगाना है दिल तो अब लगाना है प्यार दिल में जगाना है। साथ तेरा निभाना है इसलिए दिल तुझसे लगाना है…
Read more »“गाँव की नई दस्तक” रचना --- ✍️ डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश" चल पड़े हैं पाँव धूल में, फ…
Read more »जीवन के स्रोत अरुण दिव्यांश जिनगी देल त भगवान के , चले खातिर दू गो राह बा । एक राह में निकलत आह , द…
Read more »भीतर की अनकही प्रतिध्वनि पंकज शर्मा मैं अपनी ही दशा से कुछ इस तरह किनारा किए हूँ मानो भीतर उठती किस…
Read more »शीत में प्रीत ले रही अंगड़ाई कुमार महेंद्र उर हिलोरित उष्ण उमंग , जपत_ तपत सर्द तृप्ति ओर । कंपन अं…
Read more »कहने का सहास करो संजय जैन इधर उधर की बातों में क्यों खुदको भटका रहे। मिलना हुआ है वर्षो में तो क्यो…
Read more »धर्म कभी नहीं होता दूर ! रचना --- डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश" न रुका—न थमा—न म…
Read more »लक्ष्य-पथ के पथिक रचना --------✍️ डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश" उठो कि सोई चेतना से, उजिया…
Read more »बाबरी मस्जिद जय प्रकाश कुवंर कितना लगाव है भारत के, एक वर्ग के लोगों को, मुगल सम्राट बाबर नाम से। …
Read more »कैसे कह दिये संजय जैन "बीना" मुंबई काश तुम जो मेरे पास होते। दिलके हर अरमान खिलते। तेरे…
Read more »स्वच्छ समाज स्वस्थ समाज अरुण दिव्यांश स्वच्छता की जरूरत आज , स्वास्थ्य का है महूरत आज । जन जन का जि…
Read more »"लकीरों का अनकहा स्पर्श" पंकज शर्मा हथेली खोलता हूँ— रोशनी एक क्षण ठहरती है और रेखा…
Read more »(संविधान पुरुष डॉ.भीम राव अंबेडकर की पुण्य तिथि "महापरिनिर्वाण दिवस"पर कुछ पंक्तियां सादर…
Read more »इंतजार है मन की बात बताना न सके। पर दिल से बातें करते हो। दुखती नस का राज अपना। क्यों इंतजार में दव…
Read more »सुबह की याद जय प्रकाश कुवंर सभी अपने नजदीक नहीं होते, कुछ दूर तो कुछ पास रहते हैं। दिल के कोने में…
Read more »प्रेम समर्पण समझ न पाया अरुण दिव्यांश बालपन खेलते खेलते बिताया , किशोरावस्था में नादानी छाया । युवा…
Read more »मैं स्वर्णिम रक्तिम मधुरिम राजस्थान हूं कुमार महेंद्र धरा अंतर सौंधी सुगंध, अनंत स्नेह प्रेम वंदन ।…
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मानव अधिकार दिवस: सम्मान, जागरूकता और वैश्विक संकल्प सत्येन्द्र कुमार पाठक हर साल 10 दिसंबर को पूरी…
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