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काल के शिखंड पर,संकल्प साधना अखंड कर
पर्यटन , देशाटन
"जलदर्पण"
दिल लगाना है
“गाँव की नई दस्तक”
जीवन के स्रोत
  "भीतर की अनकही प्रतिध्वनि"
शीत में प्रीत ले रही अंगड़ाई
कहने का सहास करो
धर्म कभी नहीं होता दूर !
लक्ष्य-पथ के पथिक
बाबरी मस्जिद
कैसे कह दिये
स्वच्छ समाज स्वस्थ समाज
"लकीरों का अनकहा स्पर्श"
हे महामनीषी,कोटि कोटि वंदन
इंतजार है
सुबह की याद
प्रेम समर्पण समझ न पाया
मैं स्वर्णिम रक्तिम मधुरिम राजस्थान हूं