एक दूजे के पूरक,मैं और मेरा प्रतिकाश
कुमार महेंद्रधारण कर धैर्यशीलता,
जन समक्ष सहर्ष नमन ।
ध्येय गौरव गान सर्वत्र,
रग रग उत्साह उमंग रमन ।
संकल्प तिमिर मूल अस्त,
सृजन सह प्रसरित प्रकाश ।
एक दूजे के पूरक,मैं और मेरा प्रतिकाश ।।
कर्म साधना अंतर प्रयास,
अथक श्रम सर्वस्व अर्पण ।
आत्म विश्वास मैत्री संग,
चाह विजय जीवन रण ।
कर्तव्य निर्वहन आराधना सम,
उर अभिलाष स्पर्श आकाश।
एक दूजे के पूरक,मैं और मेरा प्रतिकाश ।।
कार्य_क्षेत्र परिधि आदर_प्रतिष्ठा,
नित्य जीवंत स्वाभिमान ।
सहज जीवन उच्च विचार,
कदापि किंचित नहीं अभिमान ।
लक्ष्य हित नव आशा तरंग,
सद्चरित दैनिक चर्या पाश ।
एक दूजे के पूरक,मैं और मेरा प्रतिकाश ।।
जीवन शैली शुद्ध सात्विक,
सकारात्मक सोच विचार ।
प्रदत्त वचन सदैव परिपूर्ण,
प्रयास नैतिक पथ विहार ।
वंदन स्तुति विधाता श्री चरण,
निज प्रतिभा कुछ और तराश ।
एक दूजे के पूरक,मैं और मेरा प्रतिकाश ।।
कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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