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सब्जी मंडी की पाठशाला

सब्जी मंडी की पाठशाला

सत्येन्द्र कुमार पाठक
शहर की रौनक, गाँव की शान,
सब्जियों में बसती सबकी जान।
आलू बोला, मैं सबका यार,
मम्मी बनाती समोसे मजेदार।
बैंगन ने पहनी सिर पर शान,
पापा बोले, यह राजा की पहचान।
भिंडी रानी है पतली-दुबली,
पुच्चू को लगती है यह बहुत भली।
लाल टमाटर गोल-मटोल,
पुच्ची कहे, इनका नहीं कोई मोल।
फूलगोभी का खिला है चेहरा,
सिम पर चढ़ा हरियाली का पहरा।
चुकंदर खाकर गाल होंगे लाल,
दादा बताते सेहत का हाल।
शकरकंद है मीठी और प्यारी,
मटर की दानेदार है सवारी।
डुग्गु बोला, छोड़ो चाट और बर्गर,
सब्जी खाकर बनो सबसे निडर।


मम्मी लाईं टोकरी भर कर,
ताजी सब्जी घर के अंदर,
आलू बोला मैं हूँ राजा,
सब रहते मेरे ही दम पर।
गोल-मटोल लाल टमाटर,
सबको लगते हैं ये सुंदर,
खाए जो भी इसे चाव से,
लाल बनेंगे उसके मुखड़े।
बैंगन मामा पहने मुकुट,
देखो बैठे शान से ऊपर,
भिंडी रानी सज-धज आई,
हरी-हरी सी लंबी पतली।
फूलगोभी खिली-खिली सी,
जैसे कोई सुंदर उपवन,
सिम की फलियाँ झूम रही हैं,
खुश होता है अपना मन।
चुकंदर से रंगत आती,
मटर के दाने मोती जैसे,
शकरकंद है मीठी-मीठी,
ऊर्जा देती हमको कैसे।
पुच्चू और पुच्ची भी दौड़े,
देख रसोई का ये मेला,
डुग्गु बोला सब्जी खाओ,
कोई रहे न अब दुबला।
दादा कहते शहर हो या गाँव,
सेहत सबसे बढ़कर है,
सब्जी जो न खाए बच्चा,
वह तो सबसे फिसड्डी है।
पापा बोले सुनो ओ बच्चों,
जंक फूड को अब तुम छोड़ो
, इन सब्जियों से नाता जोड़ो,
अपनी सेहत तुम बनाओ।


इस गजल की खास बात:
शिक्षा: इसमें जंक फूड के बजाय सब्जियों के महत्व को बताया गया है।
ज्ञान: सब्जियों के गुणों और उनके शारीरिक लाभों की ओर इशारा किया गया है।
पात्र: इसमें परिवार के सभी सदस्यों और बच्चों के आपसी प्रेम को दर्शाया गया है।


सत्येन्द्र कुमार पाठक


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