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हमसफ़र

हमसफ़र

जय प्रकाश कुवंर
हम उस जमाने के लोग हैं,
जब प्यार शुरू ऐसे होता था।
पहले शादी होती थी,
फिर वर वहू में प्यार होता था।।
एक अनजान लड़की घर आती थी,
उसे एक अनजान वर मिलता था।
बिना किसी गिलवा शिकायत के,
दोनों में प्यार का फूल खिलता था।।
अनजान लड़की पर घर आकर,
जीवन भर साथ निभाती थी।
आयु के अंतिम दहलीज पर आकर,
पति के सामने स्वर्ग चली जाती थी।।
घर खुशहाल रहता था,
धन वंश सब कुछ पाकर।
एक अनजान लड़की संवार देती थी घर,
बिना देखे दुसरे के घर आकर।।
आज कल रूप देख,
पहले सब जांच बुझकर ,व्याह होता है।
रिश्ता पति पत्नी का निभता है तब तक,
जब तक दोनों में पैसा और ,
कामदेव का प्रभाव रहता है।।
जैसे ही रूप विखर गया,
लड़ते झगड़ते जब मन भर गया।
प्यार, जीवन साथी, हम सफर दोनों का,
ज्यादातर डगर है नया नया।।
जय प्रकाश कुवंर
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