लव ( हिन्दी आंग्ल मिश्रित )
अरुण दिव्यांशइश्क हुआ मिस्ड
टाॅक हुआ टाॅल ।
डल हुआ डाॅल ,
कोल सा काॅल ।।
जैसे उड़े नभ में ,
मन हुआ बाॅल ।
नवयुग नवनाम ,
बाजार है माॅल ।।
संसारी बाजार में ,
रूप बदला ऑल ।
आए हो धरा पर ,
निज देख ले राॅल ।।
नेचर हुआ गाॅल ,
मैन हुआ फाॅल ।
बढ़ा चढ़ा स्टाॅल ,
लव हुआ स्माॅल ।।
फीमेल या मेल ,
हर कोई रंगे नेल ।
मंकी टेल दृष्टिगत ,
मानव अदृश्य टेल ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
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