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डॉ. संगीता सागर के काव्य संग्रह ‘माँ तेरे जाने के बाद’ का लोकार्पण

डॉ. संगीता सागर के काव्य संग्रह ‘माँ तेरे जाने के बाद’ का लोकार्पण

मुजफ्फरपुर । शहर के ऐतिहासिक नवयुवक समिति, सरैयागंज के प्रांगण में 8 फरवरी को साहित्यिक संवेदनाओं का एक अनूठा संगम देखने को मिला। अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. संगीता सागर के नूतन काव्य संग्रह ‘माँ तेरे जाने के बाद’ का भव्य विमोचन समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुजफ्फरपुर के प्रबुद्ध साहित्यकारों और गणमान्य अतिथियों ने पुस्तक को मातृत्व और विरह की एक कालजयी कृति बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता रवीन्द्र प्रसाद सिंह ने की। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मुजफ्फरपुर की उप महापौर मोनालिसा उपस्थित रहीं। मंच की शोभा मुख्य अतिथि डॉ. उषा श्रीवास्तव एवं डॉ. पुष्पा गुप्ता ने बढ़ाई। साथ ही, वरिष्ठ साहित्यकार सतेन्द्र कुमार सत्यम की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम के साहित्यिक स्तर को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं।विमोचन के उपरांत अपने संबोधन में उप महापौर मोनालिसा ने कहा:"साहित्य समाज का दर्पण होता है और इस प्रकार के आयोजन हमें हमारे मूल मानवीय मूल्यों से जोड़ते हैं। डॉ. सागर की यह कृति नई पीढ़ी को रिश्तों की अहमियत समझाएगी।"मुख्य अतिथियों ने पुस्तक की समीक्षा करते हुए इसे हिंदी साहित्य जगत में एक 'भावपूर्ण योगदान' करार दिया। उन्होंने कहा कि डॉ. संगीता सागर ने अपनी कविताओं के माध्यम से एक मां के खोने के दर्द और उसकी स्मृतियों को जिस सूक्ष्मता से उकेरा है, वह पाठक के हृदय को झकझोर देता है। "माँ सिर्फ माँ नहीं, पूरी कायनात होती है" । भावुक स्वर में अपनी रचना प्रक्रिया को साझा करते हुए कवयित्री डॉ. संगीता सागर ने कहा कि यह काव्य संग्रह उनके व्यक्तिगत अनुभवों और अंतर्मन की भावनाओं का प्रतिबिंब है। उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा, "मां सिर्फ मां नहीं होती, वह पूरी कायनात होती है।" उन्होंने इस कृति को अपनी मां की स्मृतियों को समर्पित करते हुए सभी उपस्थित साहित्य प्रेमियों के प्रति आभार प्रकट किया । कार्यक्रम के दूसरे सत्र में शहर के विभिन्न कवियों और कवयित्रियों ने पुस्तक के अंशों पर चर्चा की और काव्य पाठ किया। आयोजन का समापन डॉ. संगीता सागर के पति संजय कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर मुजफ्फरपुर के लगभग सभी प्रमुख साहित्यकार और कला प्रेमी मौजूद रहे, जिससे पूरा वातावरण काव्यमय बना रहा।
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