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जीवन साथी चुनने की रश्म

जीवन साथी चुनने की रश्म

संजय जैन
मात-पिता बहिन-बहिनोई संग
गया पुत्र देखन लड़की को।
अपने संस्कारो और मर्यादाओं को
पूरे अपने अंदर समेटकर।
पहुँच गये लड़की वालो के घर
पूरे आदर सत्यकार के संग।
चरण स्पर्श बड़े बूढ़ो के करके
प्रथम शिष्टचार निभाया उसने।।


देख लड़के के ये आचरण को
लड़की वाले बहुत प्रसन्न हुए।
हृदय द्वार दिलके खोले और
इज्जत और सम्मान दिया।
जिससे लड़के वालों का भी
ह्रदय बहुत गद गद हुआ।
दोनों परिवार का देख मिलन
रिश्ते के द्वार खुलना शुरू हुआ।।


बात चीत परिजनों से कर
फिर सब कुछ ज्ञात हुआ।
दोनों परिवारों का परिचय
बातों बातों में ज्ञात हुआ।
सब कुछ मिलता जुलता और
व्यवहारिक बातों का आभास हुआ।
दोनों अगर बंधन में बंधते है तो
जोड़ी बन जायेगी राधा-कृष्ण जैसी।।


लड़का लड़की मिलकर आपस में
बात चित किये ब्याह के बारे में।
अहिंम भूमिका निभाई जिसमें
लड़के की छोटी बहिन ने।
दोनों को एकांत दिलवाया
जिससे खुलकर बात करे।
अपने जीवन साथी का फिर
दोनो मिलकर चुनाव करे।।


माता पिता दोनों के मिलकर
आपस में बहुत प्रसन्न हुए।
एक दूसरे ने फिर देखो
हृदय द्वार को खोल दिये।
अब थोड़ी सी औपचारिकता
दोनों परिवारों की शेष रही।
दोनों बच्चें अब मुख से बोले
हम एक दूसरे को पसंद किये।
हम एक दूसरे को पसंद किये।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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