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भीड़भाड़ का क्या करना है

भीड़भाड़ का क्या करना है

डॉ रश्मि प्रियदर्शनी
भीड़भाड़ का क्या करना है, जो भी हों, वे अपने हों।
जिनसे जुड़ी हुई हों आशाएँ, भविष्य के सपने हों।।
जिनपर हो विश्वास, साथ वे डंटे रहेंगे मुश्किल में।
होने देंगे कभी न तनहा, खुदगर्जो की महफिल में।।
जिनकी कथनी एवं करनी में समानता समता हो।
गर्व भरा हो हृदय, सत्य पथ पर चलने की क्षमता हो।।
हों ईमानदार, जो ईर्ष्या और द्वेष से दूर रहें।
पूर्ण करें जो भी प्रण लें, औ' करें वही जो बात कहें।।
ढुलमुल हो व्यक्तित्व न जिनका, आदर्शों पर रहें अटल।
जो हों सच्चे, जिनके अंतर्मन में नहीं भरा हो छल।।
जलकुंभियाँ हटा दें यदि सर में नव कमल पनपने हों।
भीड़भाड़ का क्या करना है, जो भी हों, वे अपने हों।।

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