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कल्पना की अल्पना में,पागल प्रेमी कवि समान

कल्पना की अल्पना में,पागल प्रेमी कवि समान

कुमार महेन्द्र
स्व रेखांकित संसार सारा,
निज ही निज मस्त मगन ।
अलग दृष्टि सोच विचार,
नित निहार धरा गगन ।
हृदयंगम छटा मनोरम,
शब्द मौन संकेत प्रज्ञान ।
कल्पना की अल्पना में,पागल प्रेमी कवि समान ।।


विक्षिप्त अनुपमा उन्माद ,
निशि दिन एक समान ।
प्रेमी प्रेयसी चाह अद्भुत,
देख परस्पर सौम्य मुस्कान ।
कवि आह्लाद सृजन संग,
नित्य मंडित काव्य शान ।
कल्पना की अल्पना में,पागल प्रेमी कवि समान ।।


प्रेरणास्पद व्यक्तित्व कृतित्व,
स्वप्न जगत सरस पथिक ।
दृश्य परिदृश्य गहन चिंतन,
मनोभाव चित्रण रसिक ।
मस्त मलंग चाल ढाल ,
सदा तत्पर नव कीर्तिमान ।
कल्पना की अल्पना में,पागल प्रेमी कवि समान ।।


सर्व कल्याण अभिलाषी संज्ञा ,
चकोर चातक सदृश रोमांस ।
पुनीत पावन काव्यकार छवि,
शब्द अठखेलियों संग रोमांच ।
सृष्टि कर्म धर्म निर्वहन सेतु,
ध्येय सौंदर्य माधुर्य दिव्य बखान ।
कल्पना की अल्पना में,पागल प्रेमी कवि समान ।।


कुमार महेन्द्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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