गुरु का उपकार
संजय जैनतुम्हीं हो गुरुवर तुम्हीं प्रभु हो।
तुम्हीं हमारे पालन हारी।।
तुम्हीं हो पिता तुम्हीं गुरुवर हो।
तुम्हीं हमारे पालन हारी।।
तुम्हीं ने मुझको क ख ग पढ़या।
तुम्हीं ने मुझको लिखना सिखाया।
तुम्हीं ने मुझको काबिल बनाया।
तुम्हीं ने मुझको लड़ना सिखाया।।
तुम्हीं हो गुरुवर तुम्हीं प्रभु हो...।।
तुम्हीं ने मुझको पैदा किया है।
तुम्हीं ने मुझ पर एहसान किया है।
तुम्हीं ने मुझको चलना सिखाया।
तुम्हीं ने मुझको दौड़ना सिखाया।।
तुम्हीं हो गुरुवर तुम्हीं प्रभु हो...।।
जो फूल खिलकर महक रहा है।
उन्हें महकना तुमने सिखाया।
तुम्हीं हो मेरे कर्ता और धर्ता ।
तुम्हीं हो मेरे जीवन के खावैया।।
तुम्हीं हो गुरुवर तुम्हीं प्रभु हो...।।
दया की दृष्टि सदा तुम रखना।
तुम्हारे आशीर्वाद जीवन अधूरा।
बिना तुम्हारे दिये ज्ञान के।
मैं इतना काबिल कभी न बनता।।
तुम्हीं हो गुरुवर तुम्हीं प्रभु हो।
तुम्हीं हमारे पालन हारी।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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