कारगिल की दुर्गम घाटी में निभाई, शहादत की परिपाटी कुमार महेंद्र जहाँ श्वास भी थम जाती थी, रक्त शिरा…
Read more »हवाओं का दौर सदा रहता, आँधियाँ बस कुछ देर की कुमार महेंद्र जो डगमगाएँ पग राहों में, तो भय से आँखें …
Read more »बारिस का मौसम संजय जैन बारिस के कारण अब। मौसम बिल्कुल ठंडा हुआ। गर्मी से लोगों को अब बड़ा राहत जो म…
Read more »हकीकत जय प्रकाश कुवंर शांति खोजते खोजते हम, और अशांत हुए जा रहे हैं। यह समझ में नहीं आ रहा है,…
Read more »प्रभु श्रीराम पुकारे हृदय नारायण झा आज अयोध्या के मंदिर के गुंबज से श्रीराम पुकारे आओ भारत वासी मे…
Read more »तिरंगे की शान अरुण दिव्यांश जिस देश का सुदृढ़ आज है । उसी का मजबूत जहाज है ।। जिस देश सौराष्ट्र महा…
Read more »(राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस – 2026) हिंद-हृदय गद्गद, तिरंगे को निहार कर कुमार महेंद्र नील गगन में …
Read more »कलम, आज युवाओं की जय बोल कुमार महेंद्र जो अन्याय के सम्मुख, सदा अडिग खड़े हैं। संकल्पों के दीप बन, …
Read more »स्वस्थ , निरोग , तंदुरुस्त अरुण दिव्यांश स्वस्थ हूॅं तो स्वस्थ अरमान है , स्वस्थ हूॅं तो अपना जहान …
Read more »"लोकतंत्र के गद्दार" रचना - डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश" लोकतंत्र पर हावी हो रहे,…
Read more »गुरु ज्ञान दर्शन रचना - डॉ अनमोल कुमार अंधेरे में जो दीप जलाए, नाम उसका "गुरु" कहलाए। श…
Read more »गाँव की आज़ादी शहर की बंदिस संजय जैन देखो देखो लोगों तुम सब नये युग में प्रवेश कर लिए। भूल गए अब पु…
Read more »जनता को बना हथियार --:भारतका एक ब्राह्मण. संजय कुमार मिश्र"अणु" लोकतंत्र पर…
Read more »सुखाड़ जय प्रकाश कुवंर धरती झांझांइल बा, फूल पत्ति मुरझाइल बा। अब बरसात मझधार बा, मूसलाधार बरखा दरक…
Read more »लोकतंत्र पर लाठी का प्रहार कुमार महेंद्र थर-थरा उठी धरा, अंबर में चीत्कार हुआ। जब शांति मार्च के यु…
Read more »कैसे बाजार चलता न बिकता है न टिकता है पर बाजार में नाम चलता है। सारा का सारा खेल बाजार का इसी तरह स…
Read more »"दमन और दावानल" पंकज शर्मा सिंहासन के मद में डूबा, फिर घिर आया अँधियारा है, …
Read more »शहर रवानगी जय प्रकाश कुवंर अइसन का मजबूरी बा। घर छोड़ल जरूरी बा।। पढ़ले लिखले जइसे तइसे। गाँव में…
Read more »आपकी लाठियां,आपकी गोलियां, जयराम जय आपकी लाठियां,आपकी गोलियां ये डरा ना सकेंगी हमें घुड़कियां। …
Read more »बीस जुलाई : तरुणाई की अरुणाई कुमार महेंद्र जंतर-मंतर की पावन धरती से, संसद के गलियारों तक। गूँजे सत…
Read more »
कारगिल की दुर्गम घाटी में निभाई, शहादत की परिपाटी कुमार महेंद्र जहाँ श्वास भी थम जाती थी, रक्त शिरा…
Read more »