“जनगणना केवल आँकड़ों का संग्रह नहीं,बल्कि राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का आधार है।” आइए, जागरूक नागरिक…
Read more »प्रेम संजय जैन प्रेम हमारा तुम्हारा दिखता है सबको। हार के दिल अपना तुम से प्यार किये। दीप जलाकर…
Read more »दिहलक उssपगडी निशानी ©भारतका एक ब्राह्मण. संजय कुमार मिश्र"अणु" ---------…
Read more »कंकरोच!कंकरोच!! --:भारतका एक ब्राह्मण. संजय कुमार मिश्र"अणु" कोट देवे खा…
Read more »"एक अनलिखी कथा" पंकज शर्मा चाहा था कभी कोई ऐसी कथा जन्म ले, जिसमें स्मृतियों की परिचित…
Read more »सूरज उगले आग अरुण दिव्यांश भाग भाग धूप से भाग , दिवा अजगर सा नाग , जल रहे जैसे ये बाग , देख सूरज उग…
Read more »कुचलने से अस्तित्व नहीं मिटता,कुछ जिंदगियाँ राख से फिर जन्म लेती हैं।यह कविता उन्हीं अदम्य आत्माओं …
Read more »रेल यात्रा संजय जैन आज मुंबई से भोपाल की 2153 रेल से यात्रा हमनें की। वातानुकूल शयन कक्ष में टिक…
Read more »तुम्हें देख पुष्पित मन अरविंद कुमार महेंद्र मधुर मुस्कान, स्नेहिल चितवन और प्रेमिल स्पर्श ने मेरे स…
Read more »साहब का रुतबा डॉ. मेधाव्रत शर्मा, डी•लिट• (पूर्व यू.प्रोफेसर) साहब का रुतबा अजब, देखिए। खब्ती दरिंद…
Read more »तोड़ने पर अक्सर टूट जाता हूँ, बेहया दूब सा फिर जम जाता हूँ। आदतें कुछ कुछ नर्म घास जैसी, आँधियों के…
Read more »राम के द्वारा मुक्ति संजय जैन मंदिर मस्ज़िदों में भेद हम। क्यों और किस लिए कर रहे। ईश्वर को भी हम औ…
Read more »मर्द कमावे घर पल जावे, औरत कमावे रौब दिखावे। जान लगी जब घर तै बाहर, घर में फिर जी न लग पावे। कुछ तो…
Read more »"नीरव अनुराग" पंकज शर्मा किस नीरव वीणा के स्वर से स्पंदित यह उर-तंत्री होती, कौन अनागत सु…
Read more »दीन - हीन अरुण दिव्यांश दीन - हीन बिन दुआ नहीं , दया हया बिन नहीं काया । दान मान बिन शान कहाॅं , खं…
Read more »चाय दिवस अरुण दिव्यांश चाय दिवस तो नित्य हो मनाते , कोई आय दिवस भी बना लो । नौकरी कृषि जो भी तुम कर…
Read more »चाय की अदाओं पर सारी दुनिया मरती है कुमार महेंद्र चाय सिर्फ एक पेय नहीं, यह अपनत्व की सौंधी खुशबू, …
Read more »जिंदगी का भरोसा नही संजय जैन अभी तो हम जिंदा है अगले पल का भरोसा नही। जन्म मृत्यु पर तुम देखो जोर क…
Read more »हे कविते! तेरे आँगन में प्रणय की फुहार कुमार महेंद्र मृदुल-मधुर हिय-तरंगिनी, मनभावन जीवन-श्रृंगार। …
Read more »कहाँ छुप गये हो, गुज़ारा नहीं है तन्हा हैं सफ़र में, कोई सहारा नहीं है, तुम बिन हमारा, कहीं गुज़ारा…
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शब्दवीणा की साहित्यिक भेंटवार्ता "एक शाम साहित्य के नाम" में सीआईएसएफ के जवान रह चुके कव…
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