"अपने प्रकाश का साक्षी" पंकज शर्मा मैंने स्वयं से पूछा— क्या अँधेरे में जीता मनुष्य…
Read more »ज्योतिष आइये आइये आपके भाग्य में क्या लिखा भूत भविष्य वर्तमान की पहचान कराइये। हाथ की लकीरें कुण्डल…
Read more »आज चंद्र-स्पर्श को आतुर है ज्योत्स्ना कुमार महेंद्र अंबर की नीलिमा में, जागी मिलन की प्यास। श्वासों…
Read more »आज कुआरी पूनम रात सच्चिदानन्द प्रेमी आज कुआरी पूनम रात तारे नभ के कब बुझ जाएँ क…
Read more »प्रीत मेरी छीनकर बता, तुझे क्या मिला? डॉ. राकेश दत्त मिश्र जिंदगी को देने वाले, जिंदगी को लेने वाले…
Read more »फक़त लिफाफा है डॉ. मेधाव्रत शर्मा, डी•लिट• (पूर्व यू.प्रोफेसर) नुमाइश तो है,मुरव्वत नही…
Read more »हे ईश्वर क्या है? डॉ. मेधाव्रत शर्मा, डी•लिट• (पूर्व यू.प्रोफेसर) किसी की बात …
Read more »निखर गई कायनात, जब आई शरद पूनम की रात कुमार महेंद्र चमक उठा अंबर का आँगन, महक उठा धरती का कण-कण। शी…
Read more »जवानी अरुण दिव्यांश जान है जवानी में , जानता जहान है । समझा जीवन को , वही तो महान है ।। बचपन बचपन …
Read more »तुम लगती शरद पूर्णिमा-सी कुमार महेंद्र नभ से उतरी परी-सी सुंदर, मन की मधुरिम आस हो तुम। तप्त मरुस्थ…
Read more »बुजुर्ग बोझ क्यों अरुण दिव्यांश बड़े लाड़ प्यार से पोषा पाला , बड़े जतन से तुझे देखा भाला , भरोसा क…
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आयुर्वेद मार्तंड वैद्य डॉ. सिद्धिनंदन मिश्र को भावभीनी श्रद्धांजलि, राष्ट्रपति सम्मान से अलंकृत विद…
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