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"अपने प्रकाश का साक्षी"
ज्योतिष
आज चंद्र-स्पर्श को आतुर है ज्योत्स्ना
आज कुआरी पूनम रात
प्रीत मेरी छीनकर बता, तुझे क्या मिला?
फक़त लिफाफा है
हे ईश्वर क्या है?
निखर गई कायनात, जब आई शरद पूनम की रात
जवानी
तुम लगती शरद पूर्णिमा-सी
बुजुर्ग बोझ क्यों