Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

गीत की पुकार

गीत की पुकार

दिलकी पुकार को दिलसे कहते है। 
मन के जज्बातो को मनसे कहते है। 
कलम हमारी कागज पर लिखती है। 
जिसे लोग बहुत प्यार से पढ़ते है।। 

गीत के भाव और कल्पना तो। 
लेखक कवि शायर की होती है। 
स्वर और आवाज़ गायक की है। 
जो श्रोताओं को बांधकर रखती है।। 

चार चाँद तब और लग जाते है। 
जब संगीतकार मधुर धुन बनाकर। 
उसे महफ़िलो में गवा देता है। 
जो महफ़िलों की शान बढ़ा देता है।। 


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews #Divya Rashmi News, #दिव्य रश्मि न्यूज़ https://www.facebook.com/divyarashmimag

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ