गीत की पुकार
दिलकी पुकार को दिलसे कहते है।
मन के जज्बातो को मनसे कहते है।
कलम हमारी कागज पर लिखती है।
जिसे लोग बहुत प्यार से पढ़ते है।।
गीत के भाव और कल्पना तो।
लेखक कवि शायर की होती है।
स्वर और आवाज़ गायक की है।
जो श्रोताओं को बांधकर रखती है।।
चार चाँद तब और लग जाते है।
जब संगीतकार मधुर धुन बनाकर।
उसे महफ़िलो में गवा देता है।
जो महफ़िलों की शान बढ़ा देता है।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें|
हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें
https://www.youtube.com/divyarashminews
#Divya Rashmi News,
#दिव्य रश्मि न्यूज़
https://www.facebook.com/divyarashmimag

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com