विश्व शांति एवं समझ दिवस
कल लिए मानवता चिंतन संकल्प ,आज शांति और समझ का दिवस ।
संभल जाऍं हम सब तो पहले ,
फिर अन्य को भी करें हम विवश ।।
आज समझाना होगा निज को भी ,
फिर शांति को भी समझना होगा ।
पाखंड और कुरीति दूर करने हेतु ,
तर्क रूपी काॅंटों में उलझना होगा।।
मानवता जीवन बहुत कठिन होता ,
मानवता बिन वह शांति है खोता ।
नहीं समझा इस शांति को जिसने ,
अपने पथ पे स्वयं काॅंटे वह बोता ।।
काॅंटे बोता तो है वह अन्यों के हेतु ,
किंतु स्वयं तलवे में चुभ जाता है ।
निज गलती को मान नहीं सकता
किंतु विधाता को दोषी बनाता है ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
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