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पटना शहर में पानी प्रवेश न करे इसलिए सभी सुरक्षात्मक उपाय पूरे करने का निर्देश

पटना शहर में पानी प्रवेश न करे इसलिए सभी सुरक्षात्मक उपाय पूरे करने का निर्देश

पटना, 03 सितंबर 2026।

गंगा नदी के जलस्तर में हो रही वृद्धि को देखते हुए जिलाधिकारी श्री कुंदन कुमार, पुलिस अधीक्षक श्री कार्तिकेय के. शर्मा एवं नगर आयुक्त श्री यशपाल मीणा सहित वरीय अधिकारियों की टीम ने गुरुवार को दीघा घाट से लेकर बिंद टोली, एलसीटी घाट, गोसाईं टोला एवं पूरे पटना टाउन प्रोटेक्शन वाल क्षेत्र का निरीक्षण कर इन क्षेत्रों में जलस्तर का जायजा लिया

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि *पटना शहर में पानी प्रवेश न करे, इसके लिए सभी आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय तुरंत पूरे किए जाएँ।* उन्होंने पटना टाउन प्रोटेक्शन वॉल में बने सभी 108 रास्तों को बंद करने का निर्देश दिया। जल संसाधन विभाग, नगर निगम एवं संबंधित टीमों को आपसी समन्वय के साथ इस कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने को कहा गया।
सलूईस गेटों के निरीक्षण के क्रम में कुछ स्थानों पर सीपेज पाए जाने पर जिलाधिकारी ने *सभी 13 सलूईस गेट के लीकेज को बंद करवाया* तथा संबंधित अधिकारियों को इसकी लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि जलस्तर में वृद्धि की स्थिति को देखते हुए *सभी डीपीएस (ड्रेनेज पंपिंग स्टेशन) को पूरी तरह क्रियाशील रखा जाए*, ताकि आवश्यकता पड़ने पर शहर से जल निकासी तत्काल की जा सके। सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों को 24 घंटे सतर्क एवं तैयार रहने का निर्देश दिया गया।

निरीक्षण के क्रम में :*पाटलिपुत्र कॉलोनी एवं आसपास के क्षेत्रों में जल प्रवेश न करें इसलिए भी सभी व्यवस्था कर लेने को कहा गया । सदाकत आश्रम के समीप नाला के माध्यम से शहर की ओर पानी आने की संभावित स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग एवं नगर निगम की संयुक्त टीम को रातभर में नाला को बंद कर लेने का निदेश दिया*

जिलाधिकारी ने नगर निगम, जल संसाधन विभाग एवं बुडको के अधिकारियों को निर्देशित किया कि गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सभी बाढ़ निरोधक एवं सुरक्षात्मक कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रातभर में पूरा करना सुनिश्चित करें। उन्होंने संवेदनशील स्थलों पर लगातार निगरानी रखने, पर्याप्त संसाधन एवं मानवबल की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार रहने को कहा।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि शहर की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा जलस्तर में वृद्धि की स्थिति में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ 24 घंटे स्थिति पर नजर रखते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

पुनपुन एवं चंडासी में भी लिया स्थिति का जायजा


जिलाधिकारी श्री कुन्दन कुमार एवं पुलिस अधीक्षक श्री कार्तिकेय के शर्मा ने पुनपुन नदी पर निर्मित रामपुर लवाईज बैराज का निरीक्षण किया। संबंधित कार्यपालक अभियंता ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि क्षेत्र में जलस्तर में वृद्धि हुई है, लेकिन वर्तमान में स्थिति नियंत्रण में एवं सामान्य है। जिलाधिकारी ने संबंधित कार्यपालक अभियंता को जिले के सभी तटबंधों की लगातार एवं प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जहां भी तटबंधों में किसी प्रकार की क्षति, कटाव अथवा कमजोर स्थिति दिखाई दे, वहां तत्काल आवश्यक मरम्मती एवं बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य शुरू कराए जाएं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी परिस्थिति में रिस्पॉन्स टाइम न्यूनतम रखा जाए, ताकि संभावित आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई करते हुए जान-माल की क्षति को न्यूनतम किया जा सके।

जिलाधिकारी ने चंडासी क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति का भी जायजा लिया तथा मौके पर संबंधित पदाधिकारियों से वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने तथा जलस्तर में होने वाले प्रत्येक परिवर्तन की निरंतर निगरानी करने का निर्देश दिया


जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ से बचाव के लिए आवश्यकतानुसार सुरक्षात्मक कार्य प्रारंभ कर दिए गए हैं।

 गंगा नदी के तट बंध पर अथमलगोला के रामनगर दियारा में, खुसरूपुर में कठौतिया नदी के तटबंध , मोकामा में गंगा नदी के तटबंध पर बराहपुर में तथा पुनपुन के गोपालपुर-तारणपुर क्षेत्र में तटबंधों की मरम्मती एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य कराया गया है। सभी संबंधित कार्यपालक अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्र के तटबंधों एवं संवेदनशील स्थलों पर 24 घंटे निगरानी रखने तथा किसी भी प्रकार की क्षति अथवा खतरे की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।


*निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया*


जिला प्रशासन द्वारा निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई की जा रही है। प्रभावित लोगों के लिए बाढ़ अंचल में एक, दानापुर अंचल में एक तथा पटना पाटलिपुत्र अंचल में दो राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं। राहत शिविरों में प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई समेत आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।


बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं की सुरक्षा एवं देखभाल के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। बाढ़ अंचल में दो, दानापुर अंचल में एक तथा पटना पाटलिपुत्र अंचल में दो पशु शिविर स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा, आवश्यक दवाइयों एवं उपचार की व्यवस्था की गई है।


*66 नावों का निःशुल्क परिचालन प्रारम्भ*


बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के आवागमन एवं आवश्यक सहायता के लिए जिला प्रशासन द्वारा कुल 66 नावों का निःशुल्क परिचालन किया जा रहा है। अथमलगोला में 5, बख्तियारपुर में 5, बाढ़ में 8, दानापुर में 14, फतुहा में 7, मनेर में 13, पटना पाटलिपुत्र अंचल में 13 तथा पुनपुन में 1 नाव का परिचालन किया जा रहा है। इससे प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों के लोगों को आवागमन में काफी सुविधा मिल रही है।


*महत्वपूर्ण घाटों पर एसडीआरएफ की मोटर बोट एवं जवान तैनात*


आपदा की स्थिति में त्वरित सहायता एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए एसडीआरएफ की टीमों को पर्याप्त संख्या में जवानों, बोट चालकों/गोताखोरों, मोटर बोट एवं अन्य आवश्यक संसाधनों के साथ महत्वपूर्ण स्थलों पर तैनात किया गया है।


बाढ़ अंचल अंतर्गत उमानाथ घाट एवं अलखनाथ घाट पर दो मोटर बोट, बख्तियारपुर अंचल अंतर्गत दो मोटर बोट, एनआईटी घाट, गांधी घाट एवं कंगन घाट पर दो मोटर बोट, दीघा घाट तथा जेपी सेतु के पूर्वी एवं पश्चिमी घाट पर दो मोटर बोट, दानापुर अंचल अंतर्गत नासरी घाट, दानापुर पीपा पुल घाट एवं अन्य घाटों पर दो मोटर बोट तथा मनेर अंचल अंतर्गत दो मोटर बोट तैनात किए गए हैं।


इसके अतिरिक्त, दो मोटर बोट को सुरक्षित रखा गया है, जिन्हें आवश्यकता के अनुसार तत्काल बचाव एवं राहत कार्य में लगाया जा सकेगा।

जिला प्रशासन द्वारा संभावित बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। संबंधित पदाधिकारियों, अभियंताओं एवं बचाव दलों को पूरी तरह अलर्ट मोड में रहने तथा किसी भी आपात स्थिति में त्वरित एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। *जिलाधिकारी द्वारा आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदियों एवं जलमग्न क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से जाने अथवा स्नान करने से बचें, बच्चों को पानी से बिलकुल दूर रखें तथा प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें*।
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