हम दोनों
अरुण दिव्यांशझीमी झीमी बरसात हो रही है ,
दिन में देख लो रात हो रही है ,
अबतक था जो अच्छा मौसम ,
बदलाव अब अकस्मात हो रही है ।
गिर रहीं बूॅंदें इस अंबर के तले ,
छतरी लगा हम दोनों प्राणी चले ,
बरसातें देखते हम हो गए बूढ़े ,
इसी अंबर तले तो हम बढ़े पले ।
ईश की महिमा बड़े नेक भले ,
खुशदिल बरसात बरसाए पानी ,
चले ले एक दूसरे का ये सहारा ,
हम पति पत्नी हमदम प्राणी ।
रिमझिम रिमझिम बरसा पानी ,
धीमी कदमें बढाए हम प्राणी ,
रिमझिम बरसा व धीमी कदमें ,
हमदम लिपटे कदम ताल ज्ञानी ।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8


0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews