राष्ट्र एवं सनातन धर्म के अभियान में समर्पित अधिवक्ता प्रेमचंद्र झा को ‘विश्व भारत वीर पुरस्कार’

विजयनगरम (आंध्र प्रदेश)। 15 अगस्त के पावन अवसर पर आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले में आयोजित एक विराट सम्मेलन में सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और राष्ट्र निर्माण के अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अधिवक्ता प्रेमचंद्र झा को ‘विश्व भारत वीर पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके सामाजिक, राष्ट्रीय और आध्यात्मिक अभियानों के प्रति समर्पण को देखते हुए प्रदान किया गया।
अधिवक्ता प्रेमचंद्र झा को पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर महाराज का कृपा-पात्र शिष्य एवं ‘विश्व ब्राह्मण भूषण’ से सम्मानित बताया गया है। वे अपने अभियान के माध्यम से भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित कराने तथा सनातन धर्म के मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
वकालत छोड़ राष्ट्र एवं सनातन धर्म के अभियान को समर्पित
बिहार के दरभंगा जिले के घनश्यामपुर थाना क्षेत्र के लगमा गांव में जन्मे प्रेमचंद्र झा ने कोलकाता हाई कोर्ट में अधिवक्ता के रूप में अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की। हालांकि, बाद में उन्होंने वकालत के पेशे को छोड़कर राष्ट्र, सनातन धर्म और सामाजिक जागरण के अभियान को अपना प्रमुख उद्देश्य बनाया।
उनके समर्थकों के अनुसार, वे भारत और नेपाल के गांवों से लेकर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों तक जाकर सनातन धर्म, राष्ट्र और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर जनजागरण का कार्य करते हैं। उनका अभियान भारत के साथ-साथ नेपाल तथा अन्य देशों तक भी पहुंचा है।
50 से अधिक देशों में अभियान का दावा
प्रेमचंद्र झा से जुड़े लोगों के अनुसार, भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित कराने के उद्देश्य से उनका अभियान 50 से अधिक देशों तक संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्र की अवधारणा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रखने का प्रयास किया जाता है।
उनके अभियान में भारत, नेपाल और भूटान को हिंदू राष्ट्र बनाए जाने की परिकल्पना को विशेष रूप से प्रमुखता दी जाती है। यह विचार पूज्य शंकराचार्य जी के कथित उद्घोष और उनके वैचारिक अभियान से प्रेरित बताया जाता है।
भारत और नेपाल में हिंदू राष्ट्र सम्मेलन
अधिवक्ता प्रेमचंद्र झा द्वारा भारत और नेपाल में कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के हिंदू राष्ट्र सम्मेलनों के आयोजन एवं संचालन में भूमिका निभाने का भी उल्लेख किया गया है। इन सम्मेलनों का उद्देश्य सनातन धर्म के प्रति जागरूकता, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा तथा राष्ट्र और धर्म से जुड़े विषयों पर समाज में विमर्श को आगे बढ़ाना बताया जाता है।
उनके समर्थकों का कहना है कि वे धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को केवल धार्मिक संस्थानों तक सीमित रखने के बजाय युवा पीढ़ी, विद्यार्थियों और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने पर जोर देते हैं।
सर्वधर्म सम्मेलन में भी हो चुके हैं सम्मानित
प्रेमचंद्र झा को इससे पूर्व कोलकाता में आयोजित एक सर्वधर्म सम्मेलन में मानव उत्थान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किए जाने का भी उल्लेख मिलता है। इससे उनके सामाजिक एवं मानवीय कार्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया जाता है।
प्रेसीडेंसी जेल में कैदियों के बीच सामाजिक जागरण
उनके सामाजिक कार्यों का एक उल्लेखनीय पक्ष कोलकाता की प्रेसीडेंसी जेल से भी जुड़ा बताया जाता है। जेल में बंद कैदियों के बीच उन्होंने समाज की मुख्यधारा से जुड़ने, सकारात्मक जीवन अपनाने और आत्म-सुधार के विषय पर वक्तव्य दिया।
बताया जाता है कि कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रहे कैदियों के बीच उनका यह संबोधन प्रभावशाली रहा और कई कैदियों ने सामाजिक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की आवश्यकता को महसूस किया।
बिहार और नेपाल की प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य
प्रेमचंद्र झा के सामाजिक योगदान का एक महत्वपूर्ण अध्याय प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं सेवा कार्यों से भी जुड़ा है। बिहार में आए भूकंप तथा नेपाल में कोसी नदी की भीषण बाढ़ के दौरान सुपौल, सहरसा और मधेपुरा सहित प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों में उनके योगदान का उल्लेख किया जाता है।
बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच पहुंचकर सहायता और सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने के उनके प्रयासों को उनके समर्थक उनके सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिनाते हैं। उनका कहना है कि संकट की घड़ी में पीड़ित मानवता की सेवा ही राष्ट्र और समाज के प्रति वास्तविक दायित्व है।
राष्ट्र, संस्कृति और समाज के प्रति समर्पण
प्रेमचंद्र झा का सार्वजनिक जीवन केवल धार्मिक अभियानों तक सीमित नहीं बताया जाता। उनके कार्यों में सामाजिक जागरण, मानव सेवा, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र के प्रति समर्पण जैसे विषय प्रमुख रहे हैं। इसी कारण उनके समर्थक उन्हें ऐसे व्यक्तित्व के रूप में देखते हैं, जिसने पेशेवर जीवन की सुविधाओं से आगे बढ़कर समाज और राष्ट्र के लिए अपना समय एवं ऊर्जा समर्पित की।
विजयनगरम में ‘विश्व भारत वीर पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने के अवसर पर उनके समर्थकों ने इसे उनके लंबे सामाजिक एवं सांस्कृतिक अभियान की मान्यता बताया। उनका कहना है कि सम्मान से उनके अभियान को नई ऊर्जा मिलेगी और सनातन संस्कृति तथा राष्ट्र के प्रति जागरूकता का संदेश अधिक व्यापक स्तर पर पहुंचाया जा सकेगा।
आज अधिवक्ता प्रेमचंद्र झा के व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रेरणा लेने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि व्यक्तिगत उपलब्धियों के साथ समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का निर्वहन भी आवश्यक है।
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