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पश्चिम बंगाल के सनातन योद्धा ने धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी का प्राकट्य दिवस मनाया।

पश्चिम बंगाल के सनातन योद्धा ने धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी का प्राकट्य दिवस मनाया।

पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर महाराज द्वारा स्थापित पीठ परिषद आदित्य वाहिनी आनंद वाहिनी पश्चिम बंगाल एवं श्री श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा संस्थान कल्याणी (पोद्दार सेवा ट्रस्ट) के तत्वाधान में सिल्वर स्प्रिंग क्लब ईएम बायपास कोलकाता में धर्म साम्राज्य स्वामी करपात्री जी महाराज के प्राकट्य दिवस के पूर्व संध्या पर विशाल आयोजन किया गया।
पश्चिम बंगाल के प्रमुख विद्वान, संत, समाज सेवी, राष्ट्रभक्ति उपस्थित हुए ।
अध्यक्षीय भाषण में कोलकाता यूनिवर्सिटी के संस्कृत विभाग के प्रमुख विद्वान प्रोफेसर डॉक्टर रवींद्रनाथ भट्टाचार्य अपने वक्तव्य में सनातन मान बिंदुओं के रक्षा के लिए धर्म सम्राट करपात्री जी के अभियान एवं उनके द्वारा लिखित दिव्या ग्रन्थ पर प्रकाश डाला ।
पुरी शंकराचार्य जी के कृपा पात्र शिष्य ब्राह्मण भूषण से सम्मानित श्री प्रेमचंद्र झा जी ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा उनका जन्म प्रतापगढ़ जिले के भटनी गांव उत्तर प्रदेश में सरयुगपारी ब्राह्मण के घर में हुआ था ।
मूलत वह गोरखपुर जिले के थे उनके पूर्वज प्रतापगढ़ जिले में आकर बस गए थे।
बचपन से ही वैराग्य भाव उनके मन में जागृत हो गया था नरवर में उन्होंने वेद वेदांत का अध्ययन किया ।
फिर हिमालय की तराई में साधना के लिए चले गए और वहां साक्षात भगवान का दर्शन हुआ एवं आदेश मिला आपका जन्म सिर्फ साधना के लिए नहीं बल्कि समाज एवं राष्ट्र को दिशा देने के लिए हुआ है ।
जिस तरह से सनातन धर्म के रक्षा के लिए ईसा से 507 वर्ष पूर्व आदि शंकराचार्य का पादुर्भाव केरल के कालडी गांव में हुआ था और सिर्फ 32 वर्ष के अवस्था में चारों धाम का उद्धार कर चार शंकराचार्य पीठ बनाए ।
उन्हीं के पदचिन्ह पर चलने वाले हरिनारायण ओझा जी ने कुछ समय के लिए माता-पिता के आग्रह पर विवाह भी किया एक कन्या का जन्म भी हुआ।
पुनः माता-पिता से आज्ञा प्राप्त कर देश एवं विश्व को दिशा देने के लिए निकल पड़े ।
जोशी मठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानंद जी महाराज से संन्यास दीक्षा प्राप्त किया एवं उनका नाम हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज पड़ा ।
भिक्षा के रूप में हाथ में जो प्राप्त होता था उसी को दिन में एक बार ही पाते थे इसी से उनका नाम स्वामी करपात्री जी महाराज पड़ा ।
उस समय गुलाम भारत का स्थिति बहुत नाजुक था राजनीतिक व्यवस्था शिथिल हो गया था उन्होंने धर्म संघ की स्थापना किया ।
सरकार तक अपना आवाज पहुंचने के लिए राजनीतिक पार्टी का स्थापना किया जिसका नाम रामराज परिषद था जिसके कई विधायक एवं सांसद भी जीते विजय हुए ।
देवभूमि भारत में गौ हत्या बंद हो उसके लिए उन्होंने बहुत विशाल आंदोलन किया लेकिन तत्कालीन सरकार ने उस आंदोलन को कुचल दिया, उनको जेल में बंद कर दिया गया और खूंखार कैदियों के द्वारा आंख में लोहे के सलाखें चुभा दिए गए कालांतर में उस वेदना के कारण उन्होंने काशी में अपना शरीर त्याग दिया।
पोद्दार सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉक्टर अशोक पोद्दार ने कल्याणी में श्री श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा संस्थान द्वारा बनाए जा रहे भव्य जगन्नाथ मंदिर, गौशाला एवं गुरुकुल के बारे में जानकारी दिया और सभी से उसमें सहयोग करने का आग्रह किया।
समाजसेवी सुरेंद्र कुमार अग्रवाल, युवा शक्ति के प्रमुख संपादक सुधांशु शेखर, राम प्रसाद शराफ, नवीन चौधरी, स्वामी अद्वैतानंद एवं अन्य भक्ता ने भी अपने-अपने विचार रखें।


इस कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉक्टर नरेंद्र पोद्दार, संजय संगनारिया, संतोष चौधरी, उषा गुप्ता, पवन मिश्रा, अनिर्बान ओझा, भवानी प्रसाद भट्टाचार्य, धनंजय ठाकुर, पवन झा, मंजू पोद्दार, पिंकी शर्मा ,प्रेम नारायण झा, अनिल अग्रवाल, सुभाष अग्रवाल, रिंकी जायसवाल पार्थ बनर्जी एवं अन्य सक्रिय रहे । कई राष्ट्र भक्तों को सनातन योद्धा सामान से भी सम्मानित किया गया.
कार्यक्रम का शुरुआत गणेश वंदना एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम से हुआ। प्रकाश किला द्वारा मंच संचालन किया गया। हर हर महादेव।
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