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कान्हा को आना होगा

कान्हा को आना होगा

कान्हा को फिर से अब
हमको बुलाना होगा।
श्रृष्टि को मुक्त करवाना होगा।
हाँ श्रृष्टि को मुक्त कराना होगा।।


पहले भी श्रृष्टि को
तुम्हीं बचाया थे।
पृथ्वी पर जन्म लेकर
तुम ही तो आये थें।
आत्याचारियों का तुमने
किया था तब अंत।
माथुरा को मुक्त काराके
उसमें कृष्ण युग लाये थे तुम।
अब फिर से तुमको वापिस
कलयुग में आना होगा।
अपनी बनाई श्रृष्टि को
तुमको बचाना होगा।।
कान्हा को फिर से अब
हमको बुलाना होगा..।।


देख बनाई अपनी दुनिया को
विचिलित बहुत हो रहे है कृष्ण।
कैसी बनाई थी हम ये दुनिया
जिसमें सब कुछ दिया था हमने।
फिर क्यों मानव ने क्या कर डाला
अपने ही घर को क्यों फूक डाला।
जिसको सौपा था कलयुग
उसने ही देखो मिटा डाला।
कान्हा का सपना धो डाला
हाँ कान्हा का सपना धो डाल।।
कान्हा को फिर से अब
हमको बुलाना होगा..।।


स्नेह प्यार से तुमने दुनिया बनाया था।
प्रेम का रंग जिस पर चढ़ाया था।
राधा के संग खुदने प्यार रचाया था।
लोगों के दिलों में प्यार जगाया था।
अब क्या हालत देखो, प्यार की हो गई।
लोगों में वासना की भूख भर गई।
कलयुग की हालत बत से बत्तर हो गई।।
कान्हा को फिर से अब
हमको बुलाना होगा।
श्रृष्टि को मुक्त करवाना होगा।
हाँ श्रृष्टि को मुक्त कराना होगा।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई


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