Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

रखवाला

रखवाला

मेरा एक वही तो रखवाला है ,
जिनका अहंकार निवाला है ।
देवों के देव शिव महाधिदेव ,
भोले भंडारी शंभू निराला हैं ।।
देवों के देव और देवाधिदेव ,
देव देवियों के जो आला हैं ।
सर्प मोर मूस बिच्छू व नंदी ,
शीश चन्द्र जिसने पाला है ।।
महल न रखते भोले भंडारी ,
झोंपड़ी में जहॅं तहॅं झाला है ।
हर जीव एक दूजे के विरोधी ,
जबकि न कहीं लगे ताला है ।।
मिलकर रहते सारे ही जीव ,
जैसे एक दूजे के ये खाला हैं ।
श्री विष्णु जी के परम पूजारी ,
श्री रामभक्त वही ये बाला हैं ।।
गाॅंजा भाॅंग से नशे में चूर ,
कमर पहने मृगछाला है ।
कानों में तो बिच्छू लटके ,
सर्प गले लगा देखो माला है ।।


पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )बिहार ।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ