संस्कृत शिक्षा को नई दिशा देने के लिए राजभवन से मिला मार्गदर्शन

- बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन से की शिष्टाचार भेंट
- मिथिला पाग, मखान माला और मिथिला पेंटिंग युक्त अंगवस्त्र से किया सम्मानित, बोर्ड का वार्षिक रिपोर्ट कार्ड सौंपा
पटना। बिहार में संस्कृत शिक्षा को अधिक प्रभावी, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में चल रहे प्रयासों को लेकर बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने बिहार के महामहिम राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन से शिष्टाचार भेंट की। राजभवन में हुई इस महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान संस्कृत शिक्षा की वर्तमान स्थिति, बोर्ड की उपलब्धियों, परीक्षा व्यवस्था, डिजिटल पहल, संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं तथा संस्कृत, संस्कृति और संस्कार को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।
भेंट के दौरान अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हुए महामहिम राज्यपाल को मिथिला पाग, विश्वप्रसिद्ध मखान की माला तथा मिथिला पेंटिंग से सुसज्जित अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। यह सम्मान केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत, विशेषकर मिथिला की गौरवशाली परंपरा और संस्कृत शिक्षा के बीच गहरे संबंध का प्रतीक रहा।.jpeg)
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राज्यपाल को सौंपा बोर्ड का वार्षिक रिपोर्ट कार्ड
अध्यक्ष श्री झा ने महामहिम राज्यपाल को बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड द्वारा पिछले एक वर्ष के दौरान किए गए कार्यों एवं उपलब्धियों का वार्षिक रिपोर्ट कार्ड भी सौंपा। उन्होंने बोर्ड की परीक्षा व्यवस्था, परिणाम प्रकाशन, विद्यालयों की स्थिति, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी, डिजिटल व्यवस्था तथा संस्कृत शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि बोर्ड की प्राथमिकता केवल परीक्षा आयोजित करना और परिणाम जारी करना नहीं है, बल्कि संस्कृत शिक्षा को समय की जरूरत के अनुरूप आधुनिक स्वरूप प्रदान करना भी है। इसी उद्देश्य से प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों में तकनीक के उपयोग को लगातार बढ़ाया जा रहा है।
मध्यमा परीक्षा में विद्यार्थियों की संख्या लगभग दोगुनी
बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष ने राज्यपाल को बताया कि मध्यमा परीक्षा 2026 में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुने विद्यार्थियों ने भाग लिया। बोर्ड के लिए यह उपलब्धि महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उनके अनुसार विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि संस्कृत शिक्षा के प्रति छात्रों और समाज में फिर से विश्वास और आकर्षण बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि संस्कृत को केवल पारंपरिक विषय के रूप में देखने की सोच को बदलने की आवश्यकता है। संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, साहित्य, विज्ञान, संस्कृति और जीवन मूल्यों से जुड़ी भाषा है। विद्यार्थियों को संस्कृत शिक्षा से जोड़ना भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मात्र 27 दिनों में प्रकाशित हुआ मध्यमा परीक्षा 2026 का परिणाम
बोर्ड की कार्यप्रणाली में समयबद्धता को प्रमुख उपलब्धि बताते हुए अध्यक्ष श्री झा ने बताया कि मध्यमा परीक्षा 2026 का परिणाम मात्र 27 दिनों के अंदर प्रकाशित किया गया।
उन्होंने कहा कि समय पर परीक्षा परिणाम जारी होने से विद्यार्थियों को आगे की शिक्षा में प्रवेश लेने तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल होने में सुविधा हुई। बोर्ड की कोशिश है कि परीक्षा और परिणाम की पूरी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित एवं समयबद्ध बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का भविष्य परीक्षा परिणाम में होने वाली देरी से प्रभावित न हो, इसके लिए बोर्ड लगातार अपनी कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहा है।
डिजिटल व्यवस्था से बोर्ड को मिल रही नई गति
अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने बोर्ड की आधुनिक और डिजिटल व्यवस्था की जानकारी भी राज्यपाल को दी। उन्होंने बताया कि संस्कृत विद्यालयों एवं संबंधित पदाधिकारियों के साथ नियमित ऑनलाइन बैठकें आयोजित की जा रही हैं। बोर्ड के पोर्टल के माध्यम से परीक्षा परिणाम, परीक्षा संबंधी सूचनाएं और अन्य आवश्यक जानकारी विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा विद्यालयों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग से बोर्ड और विद्यालयों के बीच संवाद अधिक तेज और प्रभावी हुआ है। आने वाले समय में तकनीक के माध्यम से संस्कृत शिक्षा की पूरी व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।
संस्कृत, संस्कृति और संस्कार को लेकर व्यापक अभियान
मुलाकात के दौरान संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष ने संस्कृत, संस्कृति और संस्कार को बोर्ड की व्यापक कार्यदृष्टि का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड केवल परीक्षा और परिणाम तक सीमित संस्था नहीं है। बोर्ड का उद्देश्य संस्कृत भाषा के साथ भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है।
उन्होंने बताया कि बिहार के विभिन्न जिलों में संस्कृत विद्यालयों से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम लोगों को संस्कृत शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा, संस्कृति, दर्शन, साहित्य और संस्कारों की महत्वपूर्ण आधारशिला है। इसलिए संस्कृत विद्यालयों को अधिक सक्रिय, व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
संस्कृत विद्यालयों और शिक्षकों की समस्याओं पर भी हुई चर्चा
अध्यक्ष श्री झा ने राज्यपाल को संस्कृत विद्यालयों, शिक्षकों और विद्यार्थियों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं से भी अवगत कराया। उन्होंने विद्यालयों की आधारभूत संरचना, शिक्षकों की समस्याओं, विद्यार्थियों को उपलब्ध सुविधाओं तथा संस्कृत विद्यालयों को और अधिक सुदृढ़ एवं व्यवस्थित किए जाने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने संस्कृत विद्यालयों को आर्थिक और आधारभूत रूप से मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना था कि जब विद्यालयों में पर्याप्त संसाधन और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध होगा, तभी विद्यार्थी संस्कृत शिक्षा के प्रति और अधिक आकर्षित होंगे तथा शिक्षक भी पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ अपनी भूमिका निभा सकेंगे।
लंबित वेतन भुगतान और विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण की जानकारी
अध्यक्ष श्री झा ने सरकार की ओर से संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी महामहिम राज्यपाल को दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में संस्कृत शिक्षा को लेकर सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने लंबित वेतन भुगतान के संबंध में 5 सितंबर को भुगतान किए जाने की घोषणा की जानकारी भी राज्यपाल को दी।
इसके साथ ही संस्कृत विद्यालयों को आवश्यक राशि उपलब्ध कराने, विद्यालयों को बेहतर ढंग से संचालित करने, मॉडल स्कूलों के विकास तथा 50 विद्यालयों को 10+2 स्तर तक उन्नत किए जाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी गई।
उन्होंने कहा कि संस्कृत विद्यालयों का सुदृढ़ीकरण केवल संस्कृत भाषा के विकास का विषय नहीं है, बल्कि यह बिहार की सांस्कृतिक और शैक्षणिक विरासत को मजबूत करने का भी विषय है।
राज्यपाल ने जताई प्रसन्नता, हरसंभव सहयोग का दिया आश्वासन
महामहिम राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड द्वारा किए जा रहे कार्यों पर प्रसन्नता व्यक्त की। विशेष रूप से परीक्षा व्यवस्था में समयबद्धता, डिजिटल माध्यमों का उपयोग, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी तथा संस्कृत, संस्कृति और संस्कार के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की उन्होंने सराहना की।
राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण भाषा है। इसके संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय हैं।
उन्होंने बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड को आश्वस्त किया कि जहां भी आवश्यकता होगी, राजभवन की ओर से हरसंभव सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृत शिक्षा एवं संस्कृति से जुड़े बड़े कार्यक्रमों में अवसर मिलने पर वे स्वयं उपस्थित होकर विद्यार्थियों, शिक्षकों और संस्कृत प्रेमियों का उत्साहवर्धन करेंगे।
संस्कृत शिक्षा के उज्ज्वल भविष्य पर मंथन
राज्यपाल और बोर्ड अध्यक्ष की मुलाकात में बिहार में संस्कृत शिक्षा के उज्ज्वल भविष्य, संस्कृत विद्यालयों को आर्थिक एवं आधारभूत रूप से मजबूत करने, विद्यार्थियों और शिक्षकों की समस्याओं के समाधान तथा संस्कृत को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
बैठक से यह संदेश भी सामने आया कि बिहार में संस्कृत शिक्षा को केवल परंपरा के संरक्षण तक सीमित रखने के बजाय उसे आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए नई पीढ़ी के लिए अधिक उपयोगी और आकर्षक बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
संस्कृत शिक्षा को नई ऊंचाई देने का संकल्प
भेंट के अंत में बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने महामहिम राज्यपाल द्वारा दिए गए मार्गदर्शन एवं सहयोग के आश्वासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बोर्ड आगे भी “संस्कृत, संस्कृति और संस्कार” के मूल मंत्र के साथ काम करते हुए संस्कृत शिक्षा को नई ऊंचाई प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
उन्होंने कहा कि संस्कृत विद्यालयों को मजबूत करना, विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना, शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करना और संस्कृत को समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना बोर्ड की प्राथमिकताओं में शामिल है।राजभवन में हुई यह मुलाकात बिहार में संस्कृत शिक्षा के पुनरोत्थान, आधुनिकीकरण और विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण संवाद के रूप में देखी जा रही है।
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