प्राणियों का सुख दु:ख भाग्य पर ही निर्भर करता है - आचार्य त्रिपुष्कर शास्त्री जी महाराज
- श्रीमदभागवत कथा का पांचवां दिन
द्वारका मंदिर आनन्दपुरी, बोरिंग कैनाल रोड मे आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पाचवें दिन पूर्वाहन में यजमान सुनील कुमार तिवारी ने सपत्निक कथा विहित पूजन किया। अपराह्न में व्यास पीठ पर कथा व्यास का पूजन किया।
पाँचवे दिन की कथा में कथाव्यास आचार्य श्री त्रिपुष्कर शास्त्री जी महाराज ने गोकुल में भगवान के जन्म महोत्सव, बाल लीला, माखन चोरी लीला की कथा सुनाये। भगवान की लीला का लौकिक महत्व बताते हुए आचार्य श्री ने कहा भगवान की प्रत्येक लीला प्रेरणादायी है, मंगलकारी है।
करुणा, वात्सल्य और शुभकामना का उल्लेखनीय प्रसंग है जब वसुदेव नन्द बाबा के घर जाते हैं अपने पुत्र को देखने। यह जानते हुए कि अब वे नन्दबाबा के पुत्र बनकर ही रहेंगे। वसुदेव नन्द बाबा से कुशलक्षेम पूछा और शुभकामना देते हुए कहा - सौभाग्य की बात है कि आप को चौथेपन में संतान की प्राप्ति हुई है । आनन्द का विषय है इसीलिए मिलने आ गया l
नन्द बाबा ने कहा भाई वसुदेव! कंस ने देवकी के गर्भ से उत्पन्न कई पुत्र मार डाले। अंतिम एक कन्या बची थी वह भी स्वर्ग सिधार गयी। संदेह नहीं कि प्राणियों का सुख दुःख भाग्य पर ही निर्भर करता है। भाग्य ही प्राणी का आश्रय है।
पूतना वध भगवान श्री कृष्ण की बाल लीला में अविद्या का नाश करने के लिए हुआ। बाल घातिनी पूतना का वध कर गोकुल को ऐसे आसुरी त्रास से मुक्त कराया l भगवान श्री कृष्ण के छठी के दिन ही आयी थी पूतना । वेश माता का धारण कर रखा था परन्तु हृदय में अत्यंत क्रूरता भरी हुई थी l ऐसी स्त्री का मुंह देखना उचित नही है इसलिए भगवान श्रीकृष्ण आँख बन्द कर लिए l माखन चोरी लीला भगवान श्री कृष्ण ने ग्वाल बाल के अधिकारों की रक्षा के लिए किया l
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