धाराकोटे में आंख चिकित्सा शिविर एवं हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी संपन्न

चिकित्सा सेवा के साथ सनातन धर्म के जनजागरण का दिया संदेश, गांव-गांव संकीर्तन एवं साप्ताहिक संगोष्ठी का आह्वान
धाराकोटे, जिला गंजाम, ओडिशा।
सनातन धर्म के प्रति जनजागरण, सामाजिक सेवा और समाज को संगठित करने के उद्देश्य से गंजाम जिले के धाराकोटे क्षेत्र में आंख चिकित्सा शिविर एवं हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन AADMP Foundation, ब्रह्मपुर के तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। चिकित्सा सेवा के साथ-साथ आयोजित आध्यात्मिक एवं सामाजिक संगोष्ठी में सनातन धर्म, सेवा, सत्संग, स्वाध्याय तथा समाज में जागरूकता बढ़ाने जैसे विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम का उद्देश्य पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर महाराज के सनातन धर्म एवं समाज जागरण से जुड़े अभियान के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना बताया गया। आयोजन में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा चिकित्सा शिविर का लाभ उठाया।
आंखों की जांच के साथ चश्मे का वितरण
कार्यक्रम के प्रारंभिक चरण में आंख चिकित्सा शिविर लगाया गया। ब्रह्मपुर से आए चिकित्सकों की टीम ने क्षेत्र के लोगों की आंखों की जांच की तथा आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया। शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अपनी आंखों की जांच कराई। जरूरतमंद लोगों को चिकित्सकीय सलाह के साथ चश्मे का भी वितरण किया गया।
ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित इस प्रकार के चिकित्सा शिविर को स्थानीय लोगों ने उपयोगी पहल बताया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि दूर-दराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए नियमित रूप से ऐसे शिविर आयोजित किए जाने चाहिए। आयोजकों की ओर से सेवा कार्यों को आगे भी जारी रखने की बात कही गई।
चिकित्सा शिविर के बाद उपस्थित लोगों के लिए प्रीतिभोज की व्यवस्था की गई। इसके उपरांत हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी शामिल हुए।
सेवा, सत्संग और स्वाध्याय से समाज को संगठित करने का आह्वान
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर महाराज के शिष्य एवं ब्राह्मण भूषण अधिवक्ता प्रेमचंद्र झा ने समाज के लोगों से सेवा, सत्संग और स्वाध्याय को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन केवल बड़े आयोजनों से नहीं, बल्कि निरंतर जनसंपर्क, आध्यात्मिक जागरण और सेवा कार्यों से संभव है।
उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि प्रत्येक क्षेत्र में नियमित रूप से साप्ताहिक संगोष्ठियों, सत्संग और संकीर्तन का आयोजन किया जाए, ताकि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपरा और सनातन मूल्यों से जोड़ा जा सके।
प्रेमचंद्र झा ने कहा कि सेवा समाज को जोड़ती है, सत्संग विचारों को शुद्ध करता है और स्वाध्याय व्यक्ति को अपने धर्म एवं संस्कृति के प्रति जागरूक बनाता है। इसलिए इन तीनों को सामाजिक जीवन का आधार बनाकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
गांव-गांव हरिकीर्तन से सनातन जागरण का संदेश
अपने संबोधन में उन्होंने महाप्रभु चैतन्य की भक्ति परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि चैतन्य महाप्रभु ने गांव-गांव जाकर हरिनाम संकीर्तन के माध्यम से भक्ति और आध्यात्मिक जागरण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संकीर्तन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और लोगों में आध्यात्मिक चेतना पैदा करने का भी माध्यम है।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि गांव-गांव में सामूहिक संकीर्तन, सत्संग और धार्मिक चर्चा के माध्यम से सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने गांवों में नियमित रूप से ऐसे कार्यक्रम आयोजित करें और समाज के अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ें।
आदि शंकराचार्य की परंपरा और सनातन जागरण पर चर्चा
संगोष्ठी में आदि शंकराचार्य की परंपरा तथा भारतीय आध्यात्मिक चिंतन में उनके योगदान पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को व्यापक स्तर पर संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश के विभिन्न क्षेत्रों को एक आध्यात्मिक सूत्र में जोड़ने का प्रयास किया।
वक्ताओं ने शंकराचार्य परंपरा के माध्यम से धर्म, दर्शन, आध्यात्मिक अनुशासन और सांस्कृतिक एकता के संदेश को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। इसी क्रम में जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर महाराज द्वारा भारत एवं नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे धार्मिक एवं सामाजिक जनजागरण अभियानों का उल्लेख किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि सनातन धर्म की मूल भावना मानव कल्याण, सेवा, सद्भाव और विश्व शांति से जुड़ी हुई है। सनातन मूल्यों के संरक्षण और प्रसार से समाज में नैतिकता एवं आध्यात्मिक चेतना को मजबूत किया जा सकता है।
भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने का संकल्प
संगोष्ठी में वक्ताओं ने भारत की प्राचीन आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने सदियों से पूरी दुनिया को ज्ञान, दर्शन, अध्यात्म और मानव कल्याण का संदेश दिया है। वक्ताओं के अनुसार सनातन संस्कृति की रक्षा और उसके मूल आदर्शों के पालन से समाज में शांति, समरसता और मानवीय मूल्यों को मजबूती मिल सकती है।
संगोष्ठी में हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को लेकर भी वक्ताओं ने अपने विचार रखे और इसे लेकर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक जनजागरण की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं ने कहा कि समाज को अपने धार्मिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों तथा परंपराओं के प्रति जागरूक होना चाहिए और इसके लिए संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक माध्यमों से संवाद और जनजागरण किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों में दिखा उत्साह
कार्यक्रम को लेकर धाराकोटे क्षेत्र के ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग चिकित्सा शिविर में पहुंचे और इसके बाद संगोष्ठी में भी उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान संकीर्तन और धार्मिक वातावरण ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक माहौल से भर दिया।
क्षेत्रवासियों ने भविष्य में भी इस प्रकार के चिकित्सा, सेवा और आध्यात्मिक जागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता जताई। ग्रामीणों ने सनातन धर्म एवं संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए गांव-गांव संकीर्तन एवं सत्संग आयोजित करने में सहयोग देने का आश्वासन दिया।
प्रमुख लोगों ने किया जनजागरण का आह्वान
कार्यक्रम में दैनिक समाचार ओड़िआ के संस्थापक प्रदीप कुमार नाहक, निर्देशक अश्विन कुमार पटनायक, पत्रकार नारायण डाकुआ, पंडित पाढ़ी, डॉ. दास, डॉक्टर साहू सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने अपने-अपने संबोधन में समाज में जागरूकता, सेवा और सनातन संस्कृति के प्रति चेतना बढ़ाने की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए।
वक्ताओं ने कहा कि समाज को मजबूत बनाने के लिए केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित रहने के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा, संस्कार और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्रों में भी निरंतर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं को भी अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने तथा समाजसेवा के कार्यों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
संकीर्तन और संकल्प के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से सनातन संस्कृति के संरक्षण, समाज सेवा और जनजागरण के लिए सक्रिय रहने का संकल्प लिया। संकीर्तन के माध्यम से सनातन जागरण का संदेश देने की बात कही गई।
अंत में उपस्थित लोगों ने “हम भारत भव्य बनाएंगे, हम हिंदू राष्ट्र बनाएंगे” के उद्घोष के साथ कार्यक्रम का समापन किया। आयोजकों ने कहा कि धाराकोटे में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक धार्मिक सभा नहीं, बल्कि चिकित्सा सेवा, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक जागरण को एक साथ जोड़ने का प्रयास था। कार्यक्रम के माध्यम से क्षेत्रवासियों में सेवा, सत्संग, स्वाध्याय और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।

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