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मिथिला की ज्योतिष-विद्या की गूंज अब कोलंबो तक

मिथिला की ज्योतिष-विद्या की गूंज अब कोलंबो तक

  • अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगे मधुबनी के डॉ. राजनाथ झा
  • 7 से 11 सितंबर तक कोलंबो में ‘द सीक्रेट एस्ट्रोलॉजिकल सिम्पोजियम’; 8 सितंबर को लाइव टॉक शो एवं अंतरराष्ट्रीय डिबेट में रखेंगे विचार

झंझारपुर/मधुबनी।
मिथिला की उस पावन धरती से, जिसने सदियों तक संस्कृत, न्याय, दर्शन और ज्योतिष की ज्ञान-परंपरा से भारतीय बौद्धिक जगत को समृद्ध किया, अब प्राचीन ज्योतिष-विज्ञान की आवाज अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर सुनाई देने जा रही है। मधुबनी जिले के झंझारपुर अनुमंडल अंतर्गत लखनौर प्रखंड के ग्राम दीप निवासी डॉ. राजनाथ झा श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सिम्पोजियम में बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह उपलब्धि न केवल मधुबनी और मिथिला, बल्कि बिहार की समृद्ध ज्ञान-विरासत के लिए भी गौरव का क्षण है।

स्वर्गीय केदारनाथ झा के पुत्र तथा ज्योतिर्वेद विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. राजनाथ झा को 7 से 11 सितंबर तक कोलंबो स्थित होटल सिनामोन बीच रिसॉर्ट में आयोजित ‘श्रीलंका: द सीक्रेट एस्ट्रोलॉजिकल सिम्पोजियम’ में एमिनेंट स्कॉलर के रूप में आमंत्रित किया गया है। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में विभिन्न देशों के ज्योतिषविद्, शोधकर्ता, विद्वान और विषय-विशेषज्ञ एकत्र होकर ज्योतिष की प्राचीन परंपरा, वर्तमान प्रासंगिकता तथा भविष्य की संभावनाओं पर विमर्श करेंगे।

मिथिला की परंपरा और वैश्विक विमर्श का संगम


मिथिला में ज्योतिष को केवल ग्रह-नक्षत्रों की गणना तक सीमित विद्या नहीं माना गया, बल्कि इसे काल, प्रकृति, मानव जीवन और ब्रह्मांडीय व्यवस्था को समझने वाली ज्ञान-परंपरा के रूप में विकसित किया गया। इसी दीर्घ और गौरवशाली परंपरा की आधुनिक अभिव्यक्ति के रूप में डॉ. राजनाथ झा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने विचार रखने का अवसर प्राप्त हुआ है।

सिम्पोजियम में उनका प्रमुख विषय ‘व्हाट इज द फ्यूचर ऑफ एस्ट्रोलॉजी एंड फ्यूचर ऑफ एस्ट्रोलॉजर्स’ निर्धारित किया गया है। अपने संबोधन में वे ज्योतिष की वर्तमान वैश्विक प्रासंगिकता, इस क्षेत्र में वैज्ञानिक एवं शोधपरक संभावनाओं तथा बदलते सामाजिक और तकनीकी परिवेश में ज्योतिषियों की भूमिका पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।

उनकी सहभागिता का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह संवाद केवल ज्योतिष की परंपरागत मान्यताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्राचीन ज्ञान और आधुनिक शोध-दृष्टि के बीच संभावित संवाद को भी अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करेगा।

8 सितंबर को लाइव टॉक शो और अंतरराष्ट्रीय डिबेट


सिम्पोजियम के दौरान 8 सितंबर को आयोजित विशेष लाइव टॉक शो एवं डिबेट में भी डॉ. राजनाथ झा भाग लेंगे। इस कार्यक्रम में ज्योतिष के भविष्य, ज्योतिषियों की बदलती भूमिका और वैश्विक स्तर पर इस प्राचीन विद्या के स्वरूप को लेकर विभिन्न विद्वानों के बीच विमर्श होगा।

डॉ. झा इस अंतरराष्ट्रीय संवाद में अपने अनुभव, अध्ययन और शोध के आधार पर तर्क प्रस्तुत करेंगे। उनके लिए यह अवसर मिथिला की पारंपरिक ज्योतिषीय दृष्टि को व्यापक वैश्विक विमर्श से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।

‘ज्योतिषाचार्य दैवज्ञ पुरस्कारम्’ से होंगे सम्मानित


ज्योतिष के क्षेत्र में उनके शोधपूर्ण एवं विशिष्ट कार्यों को देखते हुए डॉ. राजनाथ झा को ‘ज्योतिषाचार्य दैवज्ञ पुरस्कारम्’ से सम्मानित किए जाने की भी जानकारी दी गई है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान और प्रतिनिधित्व का यह अवसर उनके दीर्घकालीन अध्ययन एवं ज्योतिष के क्षेत्र में किए गए कार्यों की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

डॉ. झा बोले-शाश्वत विद्या का भविष्य उज्ज्वल


अंतरराष्ट्रीय सिम्पोजियम में अपने प्रतिनिधित्व को लेकर डॉ. राजनाथ झा ने कहा, “काल की जो स्थिति और गति है, वह ज्योतिष विद्या और ज्योतिषी—दोनों के लिए उज्ज्वल भविष्य का संकेत कर रही है। यह शाश्वत विद्या है, इसलिए इसका भविष्य भी निरंतर उन्नत रहेगा।”

उनके इस दृष्टिकोण में ज्योतिष को केवल अतीत की परंपरा के रूप में देखने के बजाय बदलते समय के साथ उसके विकास और प्रासंगिकता की संभावनाओं पर बल दिखाई देता है।

ग्राम दीप से कोलंबो तक-मिथिला की प्रतिभा का अंतरराष्ट्रीय सफर


मधुबनी के एक छोटे से ग्राम दीप से निकलकर श्रीलंका की राजधानी कोलंबो के अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने की डॉ. राजनाथ झा की यात्रा अपने आप में प्रेरणादायी है। यह यात्रा इस बात का भी प्रमाण है कि भारत के गांवों में आज भी ऐसी ज्ञान-परंपराएं और प्रतिभाएं मौजूद हैं, जिन्हें उचित अवसर मिलने पर वे वैश्विक मंच पर अपनी पहचान स्थापित कर सकती हैं।

मिथिला सदियों से विद्या और विमर्श की भूमि रही है। संस्कृत, न्याय, मीमांसा, दर्शन और ज्योतिष के क्षेत्र में यहां की परंपरा ने भारतीय ज्ञान-विज्ञान को गहराई प्रदान की है। डॉ. झा का कोलंबो में प्रतिनिधित्व उसी परंपरा की आधुनिक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

अब विश्व मंच पर मिथिला की ज्ञान-परंपरा


कोलंबो में डॉ. राजनाथ झा की उपस्थिति केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि मिथिला की प्राचीन ज्ञान-परंपरा और आधुनिक वैश्विक विमर्श के बीच बन रहे एक नए सेतु का संकेत भी है। अंतरराष्ट्रीय विद्वानों के बीच ज्योतिष के भविष्य पर उनके विचार यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं कि इस प्राचीन भारतीय विद्या को आधुनिक शोध, तकनीक और वैश्विक अकादमिक संवाद के साथ किस प्रकार आगे बढ़ाया जाए।

ग्राम दीप से कोलंबो तक की यह यात्रा मिथिला की उस ज्ञान-ज्योति का अंतरराष्ट्रीय विस्तार है, जिसकी लौ सदियों से संस्कार, साधना और विद्या की परंपरा में प्रज्वलित रही है। अब देखना यह होगा कि 8 सितंबर को कोलंबो के अंतरराष्ट्रीय मंच से डॉ. राजनाथ झा की आवाज किस प्रकार मिथिला की इस प्राचीन विद्या को वैश्विक विमर्श के केंद्र में स्थापित करती है।

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