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मन भावन का साथ

मन भावन का साथ

संजय जैन

मन भावन का साथ मिला
व्याह अभी तक हुआ नही।
दिल की बातें कहने का
मौका अब तक मिला नही।
दूर रहे या पास रहे हो
पर हम तो करीब बने रहे।
कल तक सपनों में जीते थे
पर अब तो दोनों साथ है।।

दरवाजे पर करते है हम
उनका रोज इंतजार अब।
जब तक घर नही आते वो
तब तक रहते बैचैन हम।
प्यार मोहब्बत का मतलब
अब सच में हम जान सके।
बनकर पति पत्नी हम दोनों
सत्य जीवन का पहचान सके।।


लड़क पचोड़ की मस्ती में
दिल हम दोनों दे बैठे।
पढ़ाई लिखाई के दिनों में
प्यार मोहब्बत जो कर बैठे।
समझ नही पाये तब हम
होती है ये क्या बला।
जिसके चक्कर में फसकर
लक्ष्य जीवन का भूल गये।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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