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मध्यमा परीक्षा 2027 में नया कीर्तिमान स्थापित करने की तैयारी, 31 अक्टूबर तक बिना विलंब शुल्क भरे जाएंगे परीक्षा फॉर्म

मध्यमा परीक्षा 2027 में नया कीर्तिमान स्थापित करने की तैयारी, 31 अक्टूबर तक बिना विलंब शुल्क भरे जाएंगे परीक्षा फॉर्म

पटना। बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड ने मध्यमा परीक्षा 2027 की तैयारियां व्यापक स्तर पर शुरू कर दी हैं। बोर्ड ने आगामी परीक्षा में विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने के साथ परीक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता, बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और उत्कृष्ट परिणाम सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मध्यमा परीक्षा 2027 में शामिल होने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए बिना विलंब शुल्क परीक्षा फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। इसके बाद निर्धारित नियमों के अनुसार विलंब शुल्क के साथ परीक्षा फॉर्म स्वीकार किए जाएंगे।
2026 में लगभग दोगुनी हुई विद्यार्थियों की संख्या

बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष श्री मृत्युंजय झा ने कहा कि बोर्ड का लक्ष्य वर्ष 2027 की मध्यमा परीक्षा में विद्यार्थियों की संख्या को अभूतपूर्व स्तर तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि मध्यमा परीक्षा 2025 की तुलना में वर्ष 2026 में विद्यार्थियों की संख्या में लगभग दोगुनी वृद्धि हुई है। इस उपलब्धि के बाद अब वर्ष 2027 में इससे भी आगे बढ़कर नया कीर्तिमान स्थापित करने की तैयारी की जा रही है।

इसके लिए पूरे बिहार में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक, प्रधानाध्यापक और आचार्य विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को मध्यमा परीक्षा के महत्व की जानकारी देंगे तथा अधिक से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन कराने और परीक्षा फॉर्म भरवाने के लिए विशेष अभियान चलाएंगे। आगे चलकर अभियान को और व्यापक बनाने के लिए जन-जागरूकता एवं संपर्क यात्रा भी आयोजित की जाएगी।
संख्या के साथ गुणवत्ता पर भी जोर

अध्यक्ष श्री मृत्युंजय झा ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाना बोर्ड का एकमात्र उद्देश्य नहीं है। परीक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता, सुव्यवस्थित संचालन और विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में सुधार भी बोर्ड की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि मध्यमा परीक्षा 2026 में लगभग 87.5 प्रतिशत परिणाम प्राप्त हुआ। विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए परीक्षा के बाद पूरक परीक्षा का भी आयोजन किया गया। विशेष उपलब्धि के रूप में मध्यमा परीक्षा 2026 का परिणाम मात्र 27 दिनों में घोषित किया गया, जो बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के इतिहास में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

आगामी परीक्षा में तकनीक और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था का उपयोग करते हुए परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, व्यवस्थित एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने पर जोर दिया जाएगा।
जनवरी-फरवरी 2027 में पोर्टल के माध्यम से विशेष ऑनलाइन कक्षाएं

मध्यमा परीक्षा 2027 की बेहतर तैयारी के लिए बोर्ड द्वारा जनवरी एवं फरवरी 2027 में वेबसाइट पोर्टल के माध्यम से विशेष ऑनलाइन तैयारी कक्षाएं संचालित करने की योजना बनाई जा रही है।

इन कक्षाओं में विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की बेहतर समझ, महत्वपूर्ण विषयों, प्रश्नों के स्वरूप, प्रभावी परीक्षा तैयारी तथा बेहतर परिणाम प्राप्त करने की रणनीति के संबंध में मार्गदर्शन दिया जाएगा। इसके लिए योग्य एवं अनुभवी संस्कृत शिक्षकों तथा संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों की सेवाएं ली जाएंगी।

अध्यक्ष ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी द्वारा विद्यार्थियों के हित में प्रारंभ किए गए विद्या साथी एवं विद्यार्थी साथी जैसे प्रयासों की भावना के अनुरूप बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड भी तकनीक का प्रभावी उपयोग करते हुए विद्यार्थियों को घर बैठे गुणवत्तापूर्ण परीक्षा तैयारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है।
सुविधाजनक स्थानों पर परीक्षा केंद्र बनाने का आग्रह

मध्यमा परीक्षा 2027 के सुचारु आयोजन के लिए परीक्षा फॉर्म भरने की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही परीक्षा केंद्रों के निर्धारण की तैयारी शुरू कर दी जाएगी। बोर्ड जिला प्रशासन से आग्रह करेगा कि विद्यार्थियों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए यथासंभव संस्कृत विद्यालयों अथवा सुविधाजनक स्थानों पर परीक्षा केंद्र निर्धारित किए जाएं।

दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले परीक्षार्थियों को अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए परीक्षा केंद्रों तक सुगम पहुंच, आवागमन और अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाएगा।
648 प्रशिक्षित और लगभग 4,500 प्रस्तावित विद्यालय होंगे अभियान से जुड़े

श्री मृत्युंजय झा ने बताया कि बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत संचालित 648 प्रशिक्षित विद्यालयों तथा लगभग 4,500 प्रस्तावित विद्यालयों की भूमिका इस अभियान में महत्वपूर्ण होगी। विशेष रूप से लगभग 300 ऐसे विद्यालय, जहां से विद्यार्थी मध्यमा परीक्षा में सम्मिलित होते हैं, उन्हें अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों एवं प्रधानाध्यापकों ने विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने और परीक्षा की बेहतर तैयारी सुनिश्चित करने के लिए सराहनीय कार्य किया था। इस वर्ष भी शिक्षक, प्रधानाध्यापक एवं आचार्य पूरे मनोयोग और समर्पण के साथ अभियान को सफल बनाने में योगदान देंगे।
“अधिक विद्यार्थी, बेहतर तैयारी, गुणवत्तापूर्ण परीक्षा और उत्कृष्ट परिणाम”

अध्यक्ष श्री मृत्युंजय झा ने कहा, “बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड का संकल्प मध्यमा परीक्षा 2027 में एक नया कीर्तिमान स्थापित करना है। हमारा लक्ष्य केवल विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक स्तर पर परीक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता, तैयारी और परिणाम को बेहतर बनाना है। विशेष ऑनलाइन तैयारी कक्षाएं, योग्य शिक्षकों का मार्गदर्शन, बेहतर परीक्षा केंद्र और पूरे बिहार में व्यापक जागरूकता अभियान इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम होंगे।”

उन्होंने सभी संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक, प्रधानाध्यापक, आचार्य, विद्यार्थी एवं अभिभावकों से अभियान में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास और व्यापक जनभागीदारी के माध्यम से मध्यमा परीक्षा 2027 में विद्यार्थियों की संख्या, परीक्षा की गुणवत्ता और उत्कृष्ट परिणाम—तीनों क्षेत्रों में नया कीर्तिमान स्थापित किया जाएगा।

बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड का संकल्प-“अधिक विद्यार्थी, बेहतर तैयारी, गुणवत्तापूर्ण परीक्षा और उत्कृष्ट परिणाम।”


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