नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद बिहार में अलर्ट, कृषि मंत्री ने अधिकारियों को दिए सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के निर्देश
- सीमावर्ती और गंडक नदी के प्रवाह क्षेत्र वाले जिलों में लगातार निगरानी के निर्देश, किसानों तक समय पर पहुंचे सूचना और सरकारी सहायता
पटना, 27 अगस्त 2026। नेपाल में हुई आकस्मिक एवं भीषण बाढ़ के बाद बिहार में संभावित जलप्रवाह और बाढ़ की स्थिति को लेकर राज्य सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है। गंडक नदी समेत अन्य नदियों के जलस्तर में संभावित बदलाव को देखते हुए कृषि विभाग को पूरी तरह मुस्तैद रहने और सीमावर्ती जिलों में स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभागीय अधिकारियों से कहा है कि वे किसी भी संभावित आपदा की स्थिति में किसानों की फसल, कृषि परिसंपत्तियों और आजीविका की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
कृषि मंत्री ने विशेष रूप से नेपाल की सीमा से लगे जिलों तथा गंडक नदी के प्रवाह क्षेत्र में आने वाले जिलों के कृषि अधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति का असर बिहार की नदियों के जलस्तर पर पड़ सकता है। ऐसे में किसी भी संभावित परिस्थिति से निपटने के लिए विभागीय स्तर पर पहले से तैयारी आवश्यक है।
कार्यालयों तक सीमित न रहे निगरानी, अधिकारी करें क्षेत्र भ्रमण
विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि संकट की घड़ी में केवल कार्यालय में बैठकर स्थिति की समीक्षा करना पर्याप्त नहीं है। अधिकारी नियमित रूप से प्रभावित एवं संभावित बाढ़ क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण करें, किसानों से सीधे संवाद स्थापित करें और जमीनी स्थिति की वास्तविक जानकारी प्राप्त करें।
उन्होंने कहा कि किसानों को संभावित बाढ़ के खतरे की जानकारी समय रहते मिलनी चाहिए, ताकि वे अपनी फसल, कृषि उपकरण और अन्य संसाधनों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा सकें। कृषि विभाग के पदाधिकारियों को स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र के साथ समन्वय बनाकर काम करने को कहा गया है।
फसल और कृषि परिसंपत्तियों की लगातार निगरानी
कृषि मंत्री ने निर्देश दिया कि संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसलों और कृषि परिसंपत्तियों की स्थिति की सतत निगरानी की जाए। कृषि यंत्र, बीज, उर्वरक सहित किसानों से संबंधित आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि आपदा की स्थिति में किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि यदि किसी क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है तो फसल क्षति का त्वरित आकलन किया जाए और उसकी रिपोर्ट समय पर विभाग को उपलब्ध कराई जाए। इससे प्रभावित किसानों को नियमानुसार सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई में तेजी लाई जा सकेगी।
जल संसाधन और स्थानीय प्रशासन से समन्वय पर जोर
कृषि विभाग के अधिकारियों को जिला प्रशासन, जल संसाधन विभाग, आपदा प्रबंधन तंत्र और अन्य संबंधित विभागों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। नेपाल से आने वाली किसी भी महत्वपूर्ण सूचना अथवा नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि को गंभीरता से लेते हुए बिना विलंब आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
मंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन में सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी संभावित खतरे की सूचना मिलने पर उसे संबंधित अधिकारियों और किसानों तक तत्काल पहुंचाया जाना चाहिए, ताकि नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
किसानों को समय पर मिले सरकारी सहायता की जानकारी
कृषि मंत्री ने अधिकारियों से अपील की कि वे किसानों को संभावित बाढ़ के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों तथा सरकार की ओर से उपलब्ध सहायता एवं सुविधाओं के बारे में जागरूक करें। उन्होंने कहा कि किसान संकट की घड़ी में स्वयं को अकेला महसूस न करें, यह सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा, “हर किसान तक सूचना और सहायता पहुंचनी चाहिए। संकट की घड़ी में कृषि विभाग किसानों का मजबूत सहारा बने। अधिकारी किसानों की समस्याएं सुनें और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सहायता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराएं।”
संवेदनशीलता और तत्परता से काम करें अधिकारी
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि प्राकृतिक आपदा का सामना केवल प्रशासनिक व्यवस्था से नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए संवेदनशीलता, तत्परता और सामूहिक प्रयास भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य के किसान सरकार की प्राथमिकता हैं और बाढ़ की स्थिति में प्रत्येक किसान की चिंता सरकार की चिंता है।
उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि वे पूरी सजगता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें और “सतर्कता, समन्वय और संवेदनशीलता” को अपना मूल मंत्र बनाकर किसानों के हित में काम करें।
राज्य सरकार स्थिति पर बनाए हुए है नजर
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार नेपाल में उत्पन्न बाढ़ की स्थिति और बिहार में उसके संभावित प्रभाव पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा। विभागीय अधिकारियों को किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि समय पर सूचना, बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से बाढ़ से होने वाले कृषि नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए विभागीय स्तर पर किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
किसान कॉल सेंटर से मिलेगी जानकारी
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि बाढ़ या कृषि संबंधी किसी भी प्रकार की सहायता एवं जानकारी के लिए किसान कॉल सेंटर के टोल-फ्री नंबर 1800-180-1551 पर संपर्क करें।कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार का मूल उद्देश्य किसानों की फसल और आजीविका को सुरक्षित रखना है। उन्होंने दोहराया“किसान सुरक्षित तो बिहार सुरक्षित। किसान की फसल और आजीविका की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च जिम्मेदारी है।”
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