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माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत की अध्यक्षता में बाढ़ पूर्व तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत की अध्यक्षता में बाढ़ पूर्व तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

  • बाढ़ से निपटने को स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, छह जिलों में विशेष सतर्कता
पटना, 27 अगस्त 2026। नेपाल के गंडक नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में फ्लैश फ्लड की स्थिति और गंडक नदी में अचानक जलप्रवाह बढ़ने की आशंका को देखते हुए बिहार स्वास्थ्य विभाग ने संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। स्वास्थ्य विभाग के सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने की। बैठक में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था, दवाओं की उपलब्धता, संवेदनशील मरीजों की सुरक्षा और महामारी की रोकथाम सहित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत समीक्षा की गई।

स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि संभावित बाढ़ की स्थिति में प्रभावित नागरिकों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं। पश्चिमी चंपारण (बेतिया), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली को विशेष रूप से संवेदनशील मानते हुए इन जिलों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है। इसके अलावा सीतामढ़ी, शिवहर सहित अन्य संवेदनशील जिलों की स्थिति पर भी लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
गर्भवती महिलाओं की होगी विशेष निगरानी

बैठक में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, नवजात शिशुओं, बुजुर्गों और गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को विशेष प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने आशा एवं एएनएम के माध्यम से बाढ़ संभावित क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं की लाइन लिस्टिंग पूरी कर ली है। सूची में संभावित प्रसव तिथि को भी दर्ज किया गया है।

बाढ़ के दौरान प्रसव की संभावना वाली महिलाओं को पहले ही निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या सुरक्षित प्रसव गृह में स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आईसीडीएस और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
जलमग्न क्षेत्रों में पहुंचेगी बोट एम्बुलेंस

बाढ़ से प्रभावित ऐसे गांव, जो पूरी तरह जलमग्न होकर टापू में तब्दील हो जाते हैं, वहां स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए बोट एम्बुलेंस और नौका औषधालय की व्यवस्था की गई है। इन नौकाओं पर डॉक्टर, पैरामेडिकल कर्मी, आवश्यक जीवनरक्षक दवाएं और प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से नौकाओं के अधिग्रहण, भाड़ा निर्धारण और संचालन की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 102 एम्बुलेंस सेवा को भी 24 घंटे अलर्ट मोड में रखने का निर्देश दिया गया है।

60 आवश्यक दवाओं का बफर स्टॉक तैयार


बाढ़ संभावित जिलों में मानक संचालन प्रक्रिया के तहत 60 प्रमुख आवश्यक एवं जीवनरक्षक दवाओं तथा टीकों का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध कराया गया है। सर्पदंश की घटनाओं को देखते हुए एंटी-स्नेक वेनम और कुत्ते एवं अन्य विषैले जीवों के काटने के उपचार के लिए एंटी-रेबीज वैक्सीन का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित किया गया है।

डायरिया और डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए ओआरएस एवं जिंक टैबलेट, पेयजल शुद्धीकरण के लिए हैलाजोन टैबलेट तथा बाढ़ के बाद कीटाणुशोधन के लिए ब्लीचिंग पाउडर और चूना उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा बुखार, जलजनित रोग, त्वचा संक्रमण और चोट के उपचार के लिए आवश्यक दवाओं का भी पर्याप्त स्टॉक रखा गया है।

राहत शिविरों के पास लगेंगे अस्थायी चिकित्सा शिविर


बाढ़ के कारण विस्थापित होने वाली आबादी के लिए बनाए जाने वाले राहत शिविरों और सामुदायिक रसोईघरों के आसपास अस्थायी चिकित्सा शिविर स्थापित किए जाएंगे। इन शिविरों में लोगों की नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ स्वच्छ भोजन और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
संक्रामक रोगों की रोकथाम पर जोर

बाढ़ के बाद डायरिया, हैजा, त्वचा रोग, मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों के फैलने की आशंका को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में ब्लीचिंग पाउडर और चूने का छिड़काव कराया जाएगा। जिला स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्थिति की लगातार निगरानी करेंगी और बीमारी फैलने की सूचना मिलने पर तत्काल चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य संबंधी कार्रवाई की जाएगी।

आपदा एजेंसियों के साथ समन्वय


स्वास्थ्य विभाग बाढ़ की स्थिति में आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखेगा। आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था के तहत एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और आवश्यकता पड़ने पर थल सेना के साथ समन्वय कर प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने की तैयारी की गई है।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री कुमार रवि, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक श्री अमित कुमार पांडेय, विशेष सचिव श्री अरविंद कुमार वर्मा, बीएमएसआईसीएल के प्रबंध निदेशक श्री सुब्रत कुमार सेन, मंत्री के आप्त सचिव श्री कौशलेंद्र कुमार सहित विभाग और संबंधित संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि संभावित बाढ़ को देखते हुए सभी तैयारियां पूरी तरह प्रभावी और समयबद्ध हों, ताकि आपदा की स्थिति में किसी भी नागरिक को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े।

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