Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

एक काल खण्ड का पूर्ण विराम है कवि सत्य नारायण का निधन

एक काल खण्ड का पूर्ण विराम है कवि सत्य नारायण का निधन

  • साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुई शोक-सभा, प्रति वर्ष दिया जाएगा स्मृति-सम्मान
पटना, २८ अगस्त। 'बिहार-गीत' के अमर रचनाकार कवि सत्यनारायण बिहार के गौरव-पुरुष और कवियों के स्वर्ण-मुकुट थे। उनके निधन से, हिन्दी की एक बड़ी और कभी न पूरी होने वाली क्षति ही नहीं, हिन्दी काव्य के एक महान काल-खण्ड का पूर्ण विराम हो गया है। 'बिहार-गीत'ही नहीं, उनकी समस्त कृतियाँ आनेवाली अनेक पीढ़ियों की कंठ-हार बनी रहेगी। जबतक 'बिहार' का अस्तित्व रहेगा, कवि सत्य नारायण लोक-कंठ में सदैव जीवित रहेंगे।

यह बातें बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित शोक-सभा की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन-अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उनकी स्मृति को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि '७४ आंदोलन' के समय 'नुक्कड़-कवि-सम्मेलनों' से लोकप्रियता के शिखर पर पहुँचे कवि सत्यनारायण ने अपनी लोक-चेतना की सशक्त रचनाओं से, हिन्दी-जगत में न केवल अपनी विशिष्ट पहचान बनायी, अपितु नवगीत के राष्ट्रीय काव्य-संस्कृति के शीर्ष पर प्रतिष्ठित हो गए। उनकी प्रकाशित कृतियाँ 'तुम ना नहीं कह सकते', 'टूटते जल बिम्ब', 'नुक्कड़-कविता', 'धरती से जुड़कर' , 'सुनें प्रजाजन', 'सभाध्यक्ष हँस रहा है' और 'स्मृतियों में' हिन्दी साहित्य की थाती हैं। जय प्रकाश आंदोलन के समय नुक्कड़ों पर पढ़ी गयी, 'सभाध्यक्ष हँस रहा है' और 'लोकतंत्र अबरा के मेहरी' जैसी उनकी काव्य-रचनाएँ, आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। सत्यनारायण जी ने पुस्तकों की ढेर नहीं लगायी। पर जो भी लिखा पूरी गम्भीरता और ज़िम्मेदारी से लिखा। इसीलिए, “जो लिखा, वह युगों की कथा बन गयी/पंक्तियाँ काव्य की घर पता बन गयी।”

डा सुलभ ने कहा कि सम्मेलन में आगामी १३ सितम्बर को उनके ९२ वें जन्म-दिवस पर उनका अभिनन्दन और उनकी समस्त रचनाओं का संकलन 'सत्यनारायण-समग्र' का लोकार्पण किया जाना था। अब उस दिन जयंती समारोह आयोजित होगा और पुस्तक भी लोकार्पित होगी। इसी वर्ष से साहित्य सम्मेलन प्रति वर्ष उनकी जयंती मनाएगा और उनकी स्मृति में एक कवि सम्मानित होंगे।
सम्मेलन के साहित्य मंत्री और सुप्रसिद्ध साहित्यकार भगवती प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि सत्यनारायण जी हिन्दी काव्य की विधा 'नवगीत' के गौरव-पुरुष थे। उनके निधन से हिन्दी-नवगीत का एक महान स्तम्भ ध्वस्त हो गया है। वे जितने बड़े कवि थे उतने ही बड़े इंसान थे।उनकी प्रकाशित सभी पाँच पुस्तकों का संकलन 'सत्यनारायण-समग्र' के रूप में प्रकाशित हुआ है, जिसके संपादन का सौभाग्य मुझे मिला।

वरिष्ठ कवि और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अवकाश प्राप्त अधिकारी बच्चा ठाकुर, विभा रानी श्रीवास्तव, डा अर्चना त्रिपाठी, शुभचंद्र सिन्हा, कुमार अनुपम, ईं अशोक कुमार, शमा कौसर 'शमा', कमल नयन श्रीवास्तव, कृष्ण रंजन सिंह, डा उपेंद्रनाथ पाण्डेय, डा शिववंश पाण्डेय, पत्रिका 'संझाबाती' के संपादक हेमंत कुमार, मधुरेश नारायण आदि साहित्यकारों ने शोकोदगार व्यक्त किए।

हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ