आपकी लाठियां,आपकी गोलियां,
जयराम जय
आपकी लाठियां,आपकी गोलियां
ये डरा ना सकेंगी हमें घुड़कियां।
बोलने का कभी भी न अवसर दिया,
अब सुनेंगे न हम आपकी बोलियां।
चैन से एक दिन भी न जीने दिया,
रात ही रात उजड़ीं कई बस्तियां।
है बराबर का अधिकार हर एक को,
क्यों न आगे बढ़ें फिर यहां बेटियां।
हेकड़ी अब ज़रा भी चलेगी नहीं,
कौन से खेत की मूली हो तुम मियां।
'जय' सुरक्षित नहीं आज मेरा वतन,
आज भी लुट रही हैं यहां डोलियां।
जयराम जय
'पर्णिका'11/1,कृष्ण विहार,आवास विकास,कल्याणपुर,
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