शहर रवानगी
जय प्रकाश कुवंरअइसन का मजबूरी बा।
घर छोड़ल जरूरी बा।।
पढ़ले लिखले जइसे तइसे।
गाँव में नोकरी धइल नइखे।।
घर भर आश लगवले बा।
धीरज मन के धरवले बा।।
कहिया बबुआ नोकरी करिहें।
घर का लोग के पेट भरिहें।।
शहर में कुछ काम मिल जाई।
ना महिन त मोटे भाई।।
गाँव छोड़ल जरूरी बा।
जवान लइकन के इहे मजबूरी बा।।
घर छोड़त में त आवता रुलाई।
बाकिर घर छोड़े के परबे करी भाई।।
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