यूपीआई शुल्क लगाने का फैसला वापस ले सरकार: भाकपा

16 सितंबर 2026
पटना। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने कहा कि यूपीआई के इस्तेमाल पर शुल्क लगाना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और यह अमेरिकी दबाब में किया गया है। सरकार का दावा है कि ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन अनुभव बताता है कि व्यापारी हमेशा नए खर्चों का बोझ ग्राहकों पर डालने का तरीका ढूंढ ही लेते हैं। यह कदम तर्कहीन भी है। पेमेंट 10 का हो या 10,000 का, इससे प्रोसेसिंग की लागत में कोई अतिरिक्त बढ़ोतरी नहीं होती। एनपीसीआई एक अच्छी-खासी नकदी और निवेश वाली संस्था है, जिसने सरकार को करोड़ों रुपये का टैक्स दिया है। सार्वजनिक डिजिटल पेमेंट सिस्टम को फीस वसूलने वाले सिस्टम में बदलने का कोई औचित्य नहीं है, जिससे अंततः ग्राहकों पर ही बोझ पड़ता है।
इस फैसले के संदर्भ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने भारत के यूपीआई और जीरो-एमडीआर फ्रेमवर्क पर स्पष्ट रूप से आपत्ति जताई है। अमेरिका ने भारत की डिजिटल पेमेंट नीतियों को व्यापार में बाधा माना है क्योंकि ये घरेलू पेमेंट सिस्टम को बढ़ावा देती हैं और अमेरिकी पेमेंट कंपनियों को नुकसान पहुंचाती हैं। वीजा और मास्टरकार्ड जैसी कंपनियों का कार्ड पेमेंट को बढ़ाने और यूपीआई जीरो रूपये को कम आकर्षक बनाने में सीधा हित है। यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन के कुल मूल्य का लगभग 65 फीसद हिस्सा 2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन का होता है, और ठीक इसी सेगमेंट पर अब शुल्क लगाया जा रहा है। मोदी सरकार ने एक बार फिर भारत के हितों की रक्षा करने के बजाय अमेरिकी दबाव के आगे घुटने टेक दिए हैं।
भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बार-बार यूपीआई को डिजिटल इंडिया के प्रतीक के तौर पर पेश किया है और विदेशी दबाव में इसकी स्वायत्तता से समझौता करना हमारी डिजिटल संप्रभुता पर एक दाग है। इससे अंततः व्यापारियों और ग्राहकों पर बोझ पड़ेगा, जबकि विदेशी पेमेंट कंपनियों के व्यावसायिक हितों को फायदा होगा। मोदी सरकार पहले ही भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम का एक बड़ा हिस्सा वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फोनपे और अल्फाबेट के स्वामित्व वाली गूगलपे को सौंप चुकी है, जो मिलकर लगभग 80 फीसद यूपीआई ट्रांजैक्शन प्रोसेस करती हैं। इन बड़ी कंपनियों से सार्वजनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के भारी इस्तेमाल के लिए शुल्क लेने और अरबों का राजस्व कमाने के बजाय, सरकार ने व्यापारियों और ग्राहकों पर बोझ डालना चुना है। यूपीआई को आसान, इंटरऑपरेबल और कम लागत वाले पेमेंट की सुविधा देने के लिए एक सार्वजनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर बनाया गया था। विदेशी कॉरपोरेट हितों को साधने के लिए इसे कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। मोदी सरकार को जन-विरोधी फैसला वापस लेना चाहिए और यूपीआई को मुफ्त रखना चाहिए।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

0 टिप्पणियाँ
दिव्य रश्मि की खबरों को प्राप्त करने के लिए हमारे खबरों को लाइक ओर पोर्टल को सब्सक्राइब करना ना भूले| दिव्य रश्मि समाचार यूट्यूब पर हमारे चैनल Divya Rashmi News को लाईक करें |
खबरों के लिए एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें contact@divyarashmi.com
#NEWS,
#hindinews