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यूपीआई पर शुल्क लगाने का फैसला अनुचित और आधारहीन : रमेश कुमार

यूपीआई पर शुल्क लगाने का फैसला अनुचित और आधारहीन : रमेश कुमार

  • व्यापारियों पर शुल्क का बोझ अंततः ग्राहकों तक पहुंचने की आशंका, सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग


पटना। भारतीय जन क्रांति दल डेमोक्रेटिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश कुमार ने यूपीआई के चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन पर शुल्क लगाने के केंद्र सरकार के फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे अनुचित, तर्कहीन और जनहित के विपरीत बताया है।

रमेश कुमार ने कहा कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम उपभोक्ताओं से सीधे यूपीआई शुल्क नहीं लिया जाएगा। नए ढांचे के तहत 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान तथा व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P लेनदेन मुफ्त रहेंगे, जबकि 2,000 रुपये से अधिक के निर्धारित व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने वाली है।

उन्होंने कहा कि भले ही शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं लिया जा रहा हो, लेकिन व्यापारियों पर पड़ने वाली अतिरिक्त लागत का प्रभाव भविष्य में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए सरकार को इस व्यवस्था के दीर्घकालिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

यूपीआई को डिजिटल इंडिया की उपलब्धि बताते हुए रमेश कुमार ने कहा कि यूपीआई ने देश में डिजिटल भुगतान को सरल, तेज, सुलभ और व्यापक बनाया है। ऐसे सार्वजनिक डिजिटल भुगतान ढांचे को शुल्क आधारित व्यवस्था की ओर ले जाने से छोटे और मध्यम व्यापारियों के सामने अतिरिक्त लागत की चुनौती खड़ी हो सकती है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार स्वयं यूपीआई को देश के डिजिटल परिवर्तन का महत्वपूर्ण आधार मानती रही है, तब इसके उपयोग और विस्तार को न्यूनतम लागत वाला बनाए रखने की नीति पर पुनर्विचार क्यों नहीं किया जा रहा है।

रमेश कुमार ने कहा कि सरकार को व्यापारियों पर आने वाले MDR के वास्तविक आर्थिक प्रभाव का सार्वजनिक आकलन कराना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी परिस्थिति में व्यापारी इस शुल्क को मनमाने ढंग से ग्राहकों से अतिरिक्त वसूली के रूप में न लें।

उन्होंने यह भी कहा कि यूपीआई के संचालन, तकनीकी सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विस्तार की लागत वास्तविक है, लेकिन उसका समाधान ऐसा होना चाहिए जिससे डिजिटल भुगतान अपनाने वाले छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। सरकार के अनुसार MDR का उद्देश्य यूपीआई पारिस्थितिकी तंत्र की दीर्घकालिक स्थिरता और विस्तार को समर्थन देना है तथा MDR सरकार या NPCI द्वारा कर के रूप में वसूल नहीं किया जाएगा।

विदेशी दबाव के आरोप पर रमेश कुमार ने कहा कि भारत की डिजिटल भुगतान नीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक हितों और अमेरिकी कंपनियों से जुड़े हितों पर सार्वजनिक बहस होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि यदि इस निर्णय के पीछे किसी विदेशी व्यापारिक दबाव या अंतरराष्ट्रीय वार्ता का प्रभाव है, तो उसकी स्थिति देश के सामने स्पष्ट की जाए।

उन्होंने कहा कि भारत का डिजिटल भुगतान ढांचा भारत की डिजिटल संप्रभुता और आत्मनिर्भर डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा है। इसलिए इसके संबंध में होने वाले किसी भी नीतिगत बदलाव में भारतीय उपभोक्ताओं, छोटे व्यापारियों और घरेलू डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

रमेश कुमार ने कहा कि सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि नए MDR से प्राप्त राशि किस प्रकार भुगतान प्रणाली में वितरित होगी और उससे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा तथा छोटे व्यापारियों तक डिजिटल भुगतान की पहुंच बढ़ाने में कितना लाभ होगा।

उन्होंने कहा कि यूपीआई को सरल, सुरक्षित, इंटरऑपरेबल और कम लागत वाला डिजिटल भुगतान माध्यम बनाए रखना देशहित में आवश्यक है। सरकार को व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर किसी भी अप्रत्यक्ष बोझ की संभावना को समाप्त करने के लिए स्पष्ट सुरक्षा व्यवस्था करनी चाहिए।

भारतीय जन क्रांति दल डेमोक्रेटिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने केंद्र सरकार से मांग की कि नए MDR ढांचे की व्यापक समीक्षा की जाए, छोटे व्यापारियों को अधिकतम संरक्षण दिया जाए और यूपीआई को लेकर ऐसा मॉडल बनाया जाए जिसमें डिजिटल भुगतान का विस्तार भी हो और व्यापारियों तथा आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव भी न पड़े।

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