राज करोगें
संजय जैनराही मनवा सुन ले मेरी।
बात पते की तू एक।
खुलकर बोलो बातें दिलकी।
अपने हक के लिए।।
समय समय पर देखो खुदको।
करो मूल्यांकन फिर तुम खुदका।
सार समझ तुझे आ जायेगा।
जब निष्पक्ष होकर सोचेगा तू।।
छोड़ विवादों को हे मानव।
इसमें क्या कुछ रखा है।
जात पात का चक्कर तूने।
क्यों दिलमें पाल रखा है।।
मानव रूप मिला है तुझको।
तो मानव बनकर जी लो तू।
सबसे बड़ी धर्म की परिभाषा।
इंसानियत को अपना ले तू।।
दिलसे दिल मिलाओं तुम।
औरों को अपनाओं तुम।
बात पते की कहता हूँ मैं।
अपनी इंसानियत देखाओं तुम।।
अपने पराये का मोह छोड़ो।
भाव सामान भी रखो तुम।
ऐसा अगर तुम कर पाओगें।
तो राज करोगें निश्चित तुम।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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