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साक्षरता के संग, हर्ष उल्लास उमंग

(विश्व साक्षरता दिवस — 2026)

साक्षरता के संग, हर्ष उल्लास उमंग

कुमार महेंद्र
अज्ञान का अंधियारा छूटे,
ज्ञान-प्रभा मुस्काएँ।
चलो आज हर एक जीवन को,
अक्षर-ज्योति दिखाएँ।
हाथों में हों कलम-पुस्तक,
बदलें जीवन का ढंग।
साक्षरता के संग, हर्ष उल्लास उमंग।।


अंगूठे का निशान मिटे अब,
जागे अपनी पहचान।
अक्षर-अक्षर दीप जलाकर,
रोशन हो हिंदुस्तान।
पढ़े बचपन, बढ़े देश अपना,
गूँजे ज्ञान-तरंग।
साक्षरता के संग, हर्ष उल्लास उमंग।।


नारी पढ़े, समाज सँवरे,
टूटें रूढ़ि-बंधन।
ज्ञान-धारा जब घर-घर पहुँचे,
महके खुशियों का चंदन।
अधिकारों का बोध बढ़े तो,
जीवन में खिले नवरंग।
साक्षरता के संग, हर्ष उल्लास उमंग।।


बुजुर्ग हों या युवा सभी अब,
अक्षर-ज्ञान पाएँ।
डिजिटल युग की इस दौड़ में,
कदम से कदम मिलाएँ।
ज्ञान बने संबल जीवन का,
जीतें हर जीवन-जंग।
साक्षरता के संग, हर्ष उल्लास उमंग।।


हर आँगन में अक्षर खिलें और,
हर मन में विश्वास।
ज्ञान-दीप से जगमग हो अब,
भारत का हर आकाश।
शिक्षित जन ही रच पाएँगे,
स्वर्णिम भारत का रंग।
साक्षरता के संग, हर्ष उल्लास उमंग।।


कुमार महेंद्र
(स्वरचित मौलिक रचना)
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