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रात तो गुजर रही

रात तो गुजर रही

जय प्रकाश कुवंर
रात तो गुजर रही पर बात बहुत बाकी है।
बादल उड़ते जा रहे बरसात अभी बाकी है।।
चांद तो अनभिज्ञ है चकोर प्रेम आश से।
चांदनी छिटक रही चकोर के पास पास से।।
रात अगर ढल गयी चांद भी जो छुप गया।
चांद और चकोर का प्रेम रिश्ता वही बना रहा।।
जय प्रकाश कुवंर
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