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सिमडेगा में AI की दस्तक: अधिकारियों को मिला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रशिक्षण, सरकारी कामकाज में आएगी तेजी

सिमडेगा में AI की दस्तक: अधिकारियों को मिला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रशिक्षण, सरकारी कामकाज में आएगी तेजी

  • दो दिवसीय कार्यशाला में AI टूल्स का Hands-on प्रशिक्षण, नागरिक सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर जोर।

सिमडेगा, 11 सितंबर। झारखंड में सरकारी कामकाज को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में सिमडेगा जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। जिला एवं प्रखंड स्तर पर कार्यरत पदाधिकारियों एवं कर्मियों की क्षमता वृद्धि तथा सरकारी कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 10 एवं 11 सितंबर 2026 को सिमडेगा में दो दिवसीय AI कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस पहल के माध्यम से पदाधिकारियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि तेजी से बदलते तकनीकी दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को प्रशासनिक कार्यप्रणाली का प्रभावी सहयोगी बनाकर सरकारी सेवाओं की गति, गुणवत्ता और कार्यकुशलता को किस प्रकार बढ़ाया जा सकता है।

सिमडेगा की उपायुक्त श्रीमती कंचन सिंह ने कार्यशाला के दौरान कहा कि मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार नई तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को लेकर सक्रिय एवं प्रतिबद्ध है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए जिला प्रशासन द्वारा अधिकारियों और कर्मियों को AI की संभावनाओं से परिचित कराने तथा इसके व्यावहारिक उपयोग के लिए प्रशिक्षित करने की पहल की गई है।

उपायुक्त ने कहा कि सिमडेगा विभिन्न सरकारी योजनाओं और विकासात्मक पहलों के माध्यम से निरंतर प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग प्रशासनिक कार्यों को और अधिक तेज, गुणवत्तापूर्ण तथा प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि AI के माध्यम से पदाधिकारी कम समय में अधिक व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से अपने कार्यों का निष्पादन कर सकेंगे। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और सुगम बनाने के साथ-साथ आम नागरिकों तक सरकारी सेवाओं तथा विभिन्न योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में भी सहायता मिल सकती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक का उद्देश्य मानव संसाधन का स्थान लेना नहीं, बल्कि प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करना और अधिकारियों को बेहतर निर्णय एवं कार्य निष्पादन में सहयोग प्रदान करना है। AI आधारित विभिन्न उपकरणों का विवेकपूर्ण और जिम्मेदार उपयोग सरकारी तंत्र में समय की बचत, दस्तावेजी कार्यों को व्यवस्थित करने, सूचनाओं के विश्लेषण तथा संचार को अधिक प्रभावी बनाने में उपयोगी हो सकता है।

जिला प्रशासन का लक्ष्य प्रशासनिक व्यवस्था में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देते हुए व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाना है। इसी उद्देश्य के तहत आयोजित यह कार्यशाला अधिकारियों और कर्मियों को भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

कार्यशाला को झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS), ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार की ओर से तकनीकी सहयोग प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान JSLPS एवं GDI Partners के तकनीकी विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मूल अवधारणा, इसके विभिन्न उपयोगों और सरकारी कार्यों में इसकी संभावनाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

प्रशिक्षण का विशेष पक्ष यह रहा कि इसे केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया। प्रतिभागियों को विभिन्न AI टूल्स से परिचित कराने के साथ-साथ Hands-on Practical Sessions भी आयोजित किए गए। इन व्यावहारिक सत्रों का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मियों को AI तकनीक के वास्तविक उपयोग का अनुभव कराना था, ताकि वे प्रशिक्षण के बाद अपने दैनिक प्रशासनिक कार्यों में इन उपकरणों का उपयोग कर सकें।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को यह समझाने पर जोर दिया गया कि AI का उपयोग केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासन, योजना निर्माण, दस्तावेजी कार्य, सूचना प्रबंधन, विश्लेषण, संचार और विभिन्न कार्यालयीन प्रक्रियाओं में भी इसका प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। इससे अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्यों के निष्पादन में सहायता मिल सकती है तथा जटिल प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित ढंग से संचालित करने की क्षमता विकसित हो सकती है।

तकनीकी प्रशिक्षण सत्रों का संचालन एवं मार्गदर्शन GDI के विशेषज्ञ श्री अंशुल गुप्ता एवं सुश्री जान्हवी बहादुर ने किया। दोनों विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को AI की कार्यप्रणाली, विभिन्न डिजिटल टूल्स की उपयोगिता तथा उन्हें प्रशासनिक संदर्भ में अपनाने के तरीकों से अवगत कराया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए व्यावहारिक अभ्यास भी कराए गए।

वहीं, JSLPS की ओर से राज्य स्तरीय पदाधिकारी श्री बिष्णु चरण परिडा, श्री अमित जैन, श्री हेम राज एवं अन्य पदाधिकारियों ने प्रशिक्षण के समन्वय तथा तकनीकी सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यशाला में अधिकारियों एवं कर्मियों ने AI आधारित तकनीकों को लेकर अपनी जिज्ञासाओं और व्यावहारिक जरूरतों को साझा किया तथा प्रशिक्षण के माध्यम से उनके उपयोग की संभावनाओं को समझने का प्रयास किया।

दो दिवसीय कार्यशाला के समापन अवसर पर प्रशिक्षण में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रमाण-पत्र वितरण के साथ ही कार्यशाला का औपचारिक समापन हुआ।

सिमडेगा जिला प्रशासन की यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी तंत्र में डिजिटल तकनीक का उपयोग लगातार बढ़ रहा है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले समय में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को प्रभावित करने वाली प्रमुख तकनीकों में शामिल हो सकती है। ऐसे में जिला स्तर पर ही पदाधिकारियों और कर्मियों को AI के प्रति जागरूक एवं प्रशिक्षित करना प्रशासन को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में सकारात्मक प्रयास है।

AI के माध्यम से सरकारी कामकाज में गति लाने के साथ-साथ नागरिक सेवाओं को अधिक सुगम बनाने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। यदि इन तकनीकों का उपयोग निर्धारित नियमों, गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और मानवीय निगरानी के साथ किया जाए तो प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है। सिमडेगा में आयोजित यह कार्यशाला इसी व्यापक बदलाव की दिशा में एक प्रारंभिक और महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखी जा रही है।

जिला प्रशासन की ओर से यह संदेश भी सामने आया कि आधुनिक तकनीक को अपनाने का उद्देश्य प्रशासन को केवल तकनीकी रूप से आधुनिक बनाना नहीं, बल्कि आम नागरिकों को बेहतर, तेज और प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराना है। प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मियों की क्षमता में तकनीकी दक्षता को जोड़कर शासन व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।

इस प्रकार सिमडेगा में आयोजित दो दिवसीय AI कार्यशाला ने सरकारी अधिकारियों एवं कर्मियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया से परिचित कराने के साथ-साथ उसके व्यावहारिक उपयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है। जिला प्रशासन की यह पहल झारखंड में तकनीक आधारित, दक्ष और नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम के रूप में सामने आई है।

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