बेटा बना पिता तो...
संजय जैनफूलों से खूब सूरत कोई नही।
सागर से गहरा कोई नही।
अब क्या तारीफ करू पिता की।
उनके जैसा संसार में कोई नहीं।।
फूलों से भी नजुक है मेरी माँ।
फिर भी नाजो से मुझे पाला है।
हर नखरा मेरा उठाया उसने।
ममता की छाओं में सुलाया मुझको।।
माँ-बाप और बेटा का कर्तव्य निभाया है।
एक पिता और बेटा बनकर दिखाया है।
दुनिया वालों के मुँह पर ताला लगाया है।
और कलयुग में राम युग दिखलाया है।।
एक कहानी पहले की थी।
एक कहानी लिखी जा रही।
दोनों कहानी का अंतर मानव।
अब तुमको ही समझना है।
हाँ बस तुमको ही बतलाना है।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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