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हिमकर श्याम संपादित ‘दूसरी आवाज’ के हिंदी दिवस विशेषांक का लोकार्पण

हिमकर श्याम संपादित ‘दूसरी आवाज’ के हिंदी दिवस विशेषांक का लोकार्पण

  • बुल्के जयंती पर ऑनलाइन साहित्य गोष्ठी आयोजित 
रांची। हिमकर श्याम संपादित पाक्षिक पत्रिका ‘दूसरी आवाज’ के हिंदी दिवस विशेषांक का मंगलवार को ऑनलाइन लोकार्पण किया गया। झारखंड साहित्य संस्कृति मंच की ओर से फादर कामिल बुल्के की जयंती पर आयोजित ऑनलाइन साहित्य गोष्ठी में मंच के कार्यकारी अध्यक्ष एवं गोष्ठी के अध्यक्ष ने विशेषांक का लोकार्पण किया। साहित्यकारों ने विशेषांक का स्वागत करते हुए हिमकर श्याम को बधाई दी। उनके संपादन में प्रकाशित विशेषांक को साहित्यकारों ने हिंदी दिवस के अवसर पर महत्वपूर्ण साहित्यिक पहल बताया।

हिमकर श्याम ने कहा, “‘दूसरी आवाज’ हिंदी की साहित्यिक चेतना को स्वर देने का मंच है।”

गोष्ठी में डॉ. गीता सिन्हा ‘गीतांजलि’, डॉ. सुरिंदर कौर ‘नीलम’, असीत कुमार, अनीता रश्मि, अर्पणा सिंह, डॉ. वैद्यनाथ मिश्र, राज रामगढ़ी, सुजाता प्रिया ‘समृद्धि’, रेनू झा, गीता चौबे ‘गूंज’, डॉ. उर्मिला सिन्हा, विनोद सिंह ‘गहरवार’, पूनम वर्मा, कृष्णा विश्वकर्मा ‘बादल’ और सुनीता अग्रवाल ने रचनात्मक प्रस्तुतियां दीं। राजीव शर्मा ने भारतीय संविधान में ‘रामत्व’ की अवधारणा पर विचार रखे।

कार्यक्रम की शुरुआत अर्पणा सिंह की सरस्वती वंदना से हुई। स्वागत मंच के सचिव विनोद सिंह ‘गहरवार’ ने किया। अध्यक्षता मंच के कार्यकारी अध्यक्ष निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव ने की। उन्होंने फादर कामिल बुल्के को रामकथा का अन्वेषक और हिंदी का अनन्य साधक बताते हुए उनके साहित्यिक योगदान को रेखांकित किया।

संचालन एवं संयोजन पूनम वर्मा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. उर्मिला सिन्हा ने किया।
प्रस्तुति दुर्गेश मोहन

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