बिहार के अगले बजट की तैयारी तेज, 1 अक्टूबर तक ऑनलाइन दर्ज होंगे बजट प्राक्कलन

- वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट निर्माण को लेकर राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित, पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और विकास लक्ष्यों पर सरकार का जोर
पटना, 8 सितंबर 2026। बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट निर्माण की तैयारियों को लेकर अपनी कवायद तेज कर दी है। इसी क्रम में वित्त विभाग के तत्वावधान में मंगलवार को पटना के गर्दनीबाग स्थित बापू टावर के सभागार में राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के बजट पदाधिकारियों, आंतरिक वित्तीय सलाहकारों तथा सहायक आंतरिक वित्तीय सलाहकारों ने भाग लिया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट प्राक्कलन तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 के पुनरीक्षित बजट प्राक्कलन को निर्धारित समयसीमा में तैयार करने के साथ-साथ बजट निर्माण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी, तकनीकी रूप से सक्षम और परिणामोन्मुख बनाना रहा।
कार्यशाला में पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से विभागीय अधिकारियों को बजट निर्माण की अद्यतन प्रक्रिया, तकनीकी पहलुओं, लेखा-वर्गीकरण, विभिन्न विशेष बजट प्रावधानों तथा वित्तीय अनुशासन से संबंधित महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश विस्तार से दिए गए।

ऑनलाइन बजट प्रक्रिया पर विशेष जोर
कार्यशाला में बजट निर्माण को डिजिटल और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष बल दिया गया। सभी विभागों को निर्देशित किया गया कि वे अपने आगामी बजट प्राक्कलन को 1 अक्टूबर 2026 तक अनिवार्य रूप से ऑनलाइन दर्ज करें।
इसके लिए संबंधित अधिकारियों को बजट निर्माण से संबंधित सॉफ्टवेयर/पोर्टल पर बजट प्रविष्टि की तकनीकी प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया। अधिकारियों को बजट प्राक्कलन तैयार करने और ऑनलाइन दर्ज करने के दौरान विभिन्न तकनीकी सावधानियों की जानकारी भी दी गई, ताकि बजट निर्माण में त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हो और निर्धारित समयसीमा का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
कार्यशाला में 15-अंकीय विपत्र कोड की संरचना तथा राजस्व एवं पूंजीगत खातों के अंतर्गत होने वाले व्यय के उचित वर्गीकरण पर भी विस्तार से चर्चा की गई। स्थापना व्यय, लघु कार्य, वृहद कार्य सहित विभिन्न प्रकार के व्ययों को सही लेखा शीर्ष के अंतर्गत शामिल करने के निर्देश दिए गए।
सतत विकास लक्ष्यों से जुड़ेगा बजट
राज्य सरकार ने आगामी बजट को विकास के व्यापक लक्ष्यों से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की है। कार्यशाला में संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप योजनाओं और कार्यक्रमों को तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।
विभागों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि योजनाओं के निर्माण के दौरान उनके भौतिक लक्ष्यों और अपेक्षित परिणामों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाए। इससे सरकारी योजनाओं पर होने वाले खर्च और उनके वास्तविक सामाजिक-आर्थिक परिणामों के बीच बेहतर संबंध स्थापित किया जा सकेगा।
जेंडर, बाल और हरित बजट पर फोकस
कार्यशाला में जेंडर बजट, बाल कल्याण बजट और हरित बजट को लेकर भी विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। महिलाओं के कल्याण एवं सशक्तीकरण से जुड़ी योजनाओं के लिए आवश्यक वित्तीय एवं भौतिक आंकड़ों को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने पर जोर दिया गया।
इसी प्रकार बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, संरक्षण और विकास से संबंधित योजनाओं के लिए बाल बजट के तहत आवश्यक आंकड़े और लक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा गया।
बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य को देखते हुए हरित बजट को भी आगामी बजट प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। विभागों को पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और जलवायु अनुकूल गतिविधियों से जुड़ी योजनाओं के आवश्यक आंकड़े एवं भौतिक लक्ष्यों की प्रविष्टि करने के संबंध में जानकारी दी गई।
2027-28 से अनुसंधान एवं विकास बजट की नई पहल
बिहार में नवाचार और ज्ञान आधारित विकास को बढ़ावा देने की दिशा में आगामी वित्तीय वर्ष से एक नई पहल की जानकारी भी कार्यशाला में दी गई। वित्तीय वर्ष 2027-28 से अनुसंधान एवं विकास (R&D) बजट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य राज्य में अनुसंधान, नवाचार, नई तकनीक और ज्ञान आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए बजटीय प्रावधानों को अधिक स्पष्ट एवं व्यवस्थित बनाना है। इससे विभिन्न विभागों में अनुसंधान एवं विकास से जुड़ी गतिविधियों पर होने वाले व्यय को अलग से चिन्हित करने और उनके प्रभाव का बेहतर आकलन करने में मदद मिल सकती है।
वित्तीय पारदर्शिता के लिए ‘800’ शीर्ष के उपयोग पर रोक
कार्यशाला में वित्तीय पारदर्शिता और बजट की विश्वसनीयता को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। महालेखाकार कार्यालय के परामर्शों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
बजट प्रावधानों को अधिक स्पष्ट एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लघु शीर्ष-800 (अन्य प्राप्तियां/अन्य व्यय) के अनावश्यक उपयोग को समाप्त करने का निर्देश दिया गया। इसका उद्देश्य बजट में होने वाले व्यय और प्राप्तियों की प्रकृति को अधिक स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना है, जिससे वित्तीय प्रबंधन और लेखा परीक्षण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सके।
स्थानीय निकायों और विश्वविद्यालयों को अनुदान पर स्पष्ट प्रावधान
कार्यशाला में स्थानीय निकायों, विश्वविद्यालयों तथा अन्य संस्थाओं को उपलब्ध कराए जाने वाले सहायक अनुदानों के संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी गई।
विभागों को वेतन, गैर-वेतन तथा परिसंपत्ति निर्माण से संबंधित अनुदानों के लिए उचित प्रावधान करने तथा इनके उपयोग का स्पष्ट वर्गीकरण सुनिश्चित करने को कहा गया। इससे सरकारी अनुदानों के वास्तविक उपयोग की निगरानी और वित्तीय जवाबदेही को और मजबूत किया जा सकेगा।
समयबद्ध और त्रुटिरहित बजट निर्माण का लक्ष्य
राज्यस्तरीय कार्यशाला के माध्यम से वित्त विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया कि आगामी बजट निर्माण केवल पारंपरिक आय-व्यय के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पारदर्शिता, परिणामोन्मुखी विकास, सामाजिक समावेशन, हरित विकास, अनुसंधान एवं नवाचार तथा डिजिटल वित्तीय प्रबंधन से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।
विभागों को निर्धारित समयसीमा में बजट प्राक्कलन तैयार करने, आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित करने तथा ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से समय पर प्रविष्टि करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, बजट में शामिल प्रत्येक प्रावधान के उद्देश्य और अपेक्षित परिणाम को स्पष्ट रखने पर बल दिया गया।
माना जा रहा है कि यह कार्यशाला बिहार सरकार के वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट निर्माण की आधारभूत प्रक्रिया को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डिजिटल प्रक्रिया, विशेष बजट प्रावधानों, अनुसंधान एवं विकास, वित्तीय पारदर्शिता और लेखा अनुशासन पर दिए गए जोर से राज्य की बजट व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने की दिशा में प्रयास दिखाई देता है।वित्त विभाग की इस पहल से अब विभागीय स्तर पर बजट तैयार करने की प्रक्रिया और तेज होगी और 1 अक्टूबर 2026 तक बजट प्राक्कलनों को ऑनलाइन दर्ज कराने के बाद आगामी बजट प्रक्रिया अगले चरण में प्रवेश करेगी।
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