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रक्षाबंधन - एक धागे में बंधी कहानियाँ

रक्षाबंधन - एक धागे में बंधी कहानियाँ

सत्येंद्र कुमार पाठक
सावन का महीना चल रहा है। चारों तरफ हरियाली है, झूले पड़ रहे हैं और बाजार में रंग-बिरंगी राखियाँ टंगी हैं। आप सब अपनी बहन के लिए या अपने भाई के लिए राखी लेने की तैयारी कर रहे होंगे।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये छोटा सा धागा इतना ताकतवर कैसे बन गया कि पूरा भारत इसे त्योहार की तरह मनाता है? इस एक धागे में सात अलग-अलग कहानियाँ बंधी हैं। आज मैं आपको वही सात कहानियाँ एक साथ सुनाऊंगा, जैसे दादी-नानी सुनाती हैं।
सबसे पहली कहानी स्वर्ग की है। स्वर्ग के राजा थे इंद्र। उनके पास बिजली वाला वज्र था। एक बार दानव बहुत शक्तिशाली हो गए और उन्होंने स्वर्ग पर हमला कर दिया। इंद्र युद्ध हारने लगे। वे बहुत उदास हो गए। तब उनकी पत्नी इंद्राणी शची देवगुरु बृहस्पति के पास गईं। गुरु जी ने कहा - "कल सावन की पूर्णिमा है। तुम एक पवित्र धागा बनाओ, उसमें मंत्र पढ़ो और अपने पति की कलाई पर बांध दो।" शची ने सुबह-सुबह उठकर हल्दी, चावल और दूब घास से एक धागा तैयार किया और मंत्र पढ़ा - "येन बद्धो बली राजा..." और इंद्र की कलाई पर बांध दिया। बस फिर क्या था, इंद्र में नई ताकत आ गई और उन्होंने दानवों को हरा दिया। इस कहानी से हमें पता चलता है कि राखी सिर्फ बहन ही नहीं, पत्नी भी पति को उसकी रक्षा के लिए बांध सकती है। यह रक्षा का धागा है।
असुर संस्कृति का राजा बलि बहुत बड़े दानी थे। वे प्रह्लाद के पोते थे। उन्होंने तीनों लोकों पर राज कर लिया। भगवान विष्णु ने उन्हें सबक सिखाने के लिए छोटे से बौने ब्राह्मण वामन का रूप लिया।वामन भगवान राजा बलि के यज्ञ में गए और कहा - "मुझे सिर्फ तीन कदम जमीन चाहिए।" राजा बलि ने कहा - "ले लो।" गुरु शुक्राचार्य ने मना किया, पर बलि अपने वचन से नहीं हटा।
फिर वामन भगवान ने विराट रूप धारण किया। एक कदम में पूरी धरती नाप ली, दूसरे में पूरा आसमान। तीसरा कदम रखने को जगह ही नहीं बची। तब राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया।
भगवान ने उसे पाताल लोक का राजा बना दिया और खुद उसके द्वारपाल बन गए। अब वैकुंठ में लक्ष्मी जी उदास हो गईं। मेरे पति द्वारपाल बन गए! वे गरीब औरत बनकर राजा बलि के पास गईं और बोलीं - "भैया, मेरा कोई भाई नहीं है, आप मेरे भाई बन जाओ।" असुर राज बलि ने कहा - "बन गया।" लक्ष्मी जी ने उसके हाथ पर राखी बांधी और तोहफे में अपने पति विष्णु जी को मांग लिया। वचन के पक्के बलि को विष्णु जी को छोड़ना पड़ा। तभी से बहन भाई को राखी बांधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। वचन का पक्का होना सबसे बड़ी बात है।
मृत्यु के देवता यम और यमुना उनकी बहन है, जो एक पवित्र नदी है। यम अपनी बहन से बहुत सालों तक नहीं मिले। एक बार सावन की पूर्णिमा पर यमुना ने अपने भाई यम को घर बुलाया। खूब अच्छा खाना बनाया और उसकी कलाई पर राखी बांधी और उसकी लंबी उम्र मांगी। यम ने खुश होकर वरदान दिया - "जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाएगा और राखी बंधवाएगा, उसे लंबी उम्र मिलेगी।" इसीलिए आज भी भाई राखी पर बहन के घर जाता है।
द्वापर युग में एक बार श्रीकृष्ण की उंगली सुदर्शन चक्र से कट गई और खून बहने लगा। पास में द्रौपदी थी। उसने तुरंत अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर कृष्ण की उंगली पर पट्टी बांध दी। श्रीकृष्ण ने कहा - "बहन, इस एक टुकड़े का कर्ज मैं पूरी जिंदगी चुकाऊंगा।"
और उन्होंने चुकाया भी। जब भरी सभा में दुशासन द्रौपदी की साड़ी खींच रहा था, तब श्रीकृष्ण ने उसकी साड़ी को इतना लंबा कर दिया कि कोई उसे खींच ही नहीं पाया।
अगर आप सच्चे मन से किसी की मदद करोगे, तो भगवान खुद आपकी मदद करेगा। राखी का मतलब है - समय पर काम आना।
यह बच्चों की सबसे प्यारी कहानी है। गणेश जी के दो बेटे थे - शुभ और लाभ। एक बार रक्षाबंधन आया। दोनों बेटे उदास थे कि हमारी तो कोई बहन ही नहीं है, हमें कौन राखी बांधेगा? गणेश जी ने अपनी शक्ति से अपनी दोनों पत्नियों ऋद्धि और सिद्धि की रोशनी से एक बेटी बनाई। उसका नाम रखा - संतोषी। संतोषी माता ने अपने दोनों भाइयों को राखी बांधी। तभी से यह परंपरा है कि गणेश जी के साथ संतोषी माता की भी पूजा होती है।
चित्तौड़ की रानी थीं कर्णावती। उनके पति की मृत्यु हो गई थी। गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने चित्तौड़ पर हमला कर दिया।
रानी अकेली थीं। उन्होंने दिल्ली के बादशाह हुमायूं को एक पत्र और एक राखी भेजी। लिखा - "भैया, आप मेरे भाई बनकर मेरी रक्षा करो।" हुमायूं मुसलमान था और कर्णावती हिंदू, पर उसने राखी का मान रखा। वह अपनी सेना लेकर चित्तौड़ के लिए निकल पड़ा। वह समय पर नहीं पहुंच पाया, पर बाद में उसने कर्णावती के बेटे को राजा बनाकर अपने भाई होने का फर्ज निभाया।
राखी धर्म नहीं देखती, जाति नहीं देखती, यह तो इंसानियत का धागा है। हिंदू , मुस्लिम , सिख , ईसाई सब भाई-भाई।
राखी का असली मतलब है - R.A.K.H.I.
R - Respect - सम्मान: अपनी बहन का सम्मान करो। A - Affection - प्रेम: अपनी बहन से प्यार करो। K - Kindness - दया: सब पर दया करो। H - Help - मदद:* मुसीबत में एक दूसरे की मदद करो। I - Integrity - ईमानदारी:* हमेशा वचन के पक्के रहो, जैसे राजा बलि।
. बाजार से प्लास्टिक वाली चमक-दमक वाली राखी मत लेना, बल्कि फूलों की, या बीज वाली राखी लेना जो बाद में पौधा बन जाए। बहन से सिर्फ रक्षा का वचन ही मत लेना, उसकी पढ़ाई, उसके सपनों की रक्षा का भी वचन लेना। एक राखी अपने उस दोस्त को भी बांधना जो अकेला है, या एक राखी हमारे देश के सैनिकों के नाम की भी रखना।, यह छोटा सा धागा पूरे भारत को एक साथ बांधता है।
आप सभी को रक्षाबंधन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

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