राहुल गांधी और सेकुलर राजनीति को मनुस्मृति को लेकर आर्य समाज ने दी शास्त्रार्थ की चुनौती
ग्रेटर नोएडा। अभी हाल ही में मनुस्मृति पर की गई अभद्र टिप्पणी को लेकर आर्य समाज ने कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और देश के सारे सेकुलर राजनीतिक दलों को घेरने का निर्णय लिया है। भाषा प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष ब्रह्मचारी आर्य सागर ने बताया कि आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुध नगर की एक विशेष बैठक में प्रांतीय आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश की न्याय सभा के प्रधान न्यायाधीश डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि राहुल गांधी उसी नेहरू और गांधीवादी सोच से ग्रस्त हैं जिसने इस देश के हिंदू समाज को तोड़ने का काम किया था और मुस्लिम तुष्टिकरण करते-करते देश को ही विभाजित करवा दिया था। कांग्रेस प्रारंभ से ही हिंदुत्व, ब्राह्मणवाद और भारतीय सनातन परंपरा की विरोधी रही है। क्योंकि इसका जन्म ही सनातन को गाली देने के लिए हुआ था। जो कांग्रेस कल परसों तक राम और रामायण को कृष्ण और गीता को काल्पनिक कहती थी, उसी के भीतर आज अचानक राम के प्रति प्रेम पनपता हुआ दिखाया जा रहा है । वास्तविकता यह है कि कांग्रेस का राम के प्रति यह प्रेम एक दिखावा है, यदि आज की कांग्रेस वंदे मातरम के बारे में यह कह सकती है कि हम अब से 90 साल पहले महात्मा गांधी द्वारा गाए गए वंदे मातरम के दो पदों को ही गाएंगे तो उसी कांग्रेस के द्वारा कल को यह भी कहा जा सकता है कि गांधी जी ने 1937 में ही यह भी स्पष्ट कर दिया था कि राम और कृष्ण काल्पनिक हैं, तो वह इन दोनों को काल्पनिक मानती है और मुस्लिम संस्कृति के नायकों को देश के लिए उपयुक्त मानती है।
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उन्होंने कहा कि इस संबंध में आर्य प्रतिनिधि सभा की एक विशेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर कहा गया है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सपा के नेता अखिलेश यादव और कम्युनिस्ट दलों सहित सारे धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दल आर्य समाज के साथ मनुस्मृति को लेकर शास्त्रार्थ करें। ज्ञात रहे कि आर्य समाज अपनी पुरानी परंपरा के अनुसार आगामी अक्टूबर महीने में मनु महोत्सव का आयोजन करने जा रहा है। जिसमें इन नेताओं को खुला आमंत्रण दिया जाएगा। जिसमें भी दम है वह वैदिक सिद्धांतों के अनुकूल मौलिक मनुस्मृति में दोष निकाले। उन्होंने कहा कि आर्य समाज के दृष्टिकोण से ब्राह्मणवाद ज्ञान की परंपरा का प्रतीक है। मनुस्मृति में कहीं पर भी जातिवाद का समर्थन नहीं किया गया है। जहां तक शूद्र की बात है तो शूद्र को राहुल गांधी जैसे नेता सही अर्थों में समझ नहीं पाए हैं और समझ भी नहीं पाएंगे, क्योंकि उनका बौद्धिक स्तर मनु के अनुकूल नहीं है। आर्य समाज ज्ञान की परंपरा के प्रति ब्राह्मणवाद, आर्यत्व के स्थानापन्न हिंदुत्व और अपनी वर्ण व्यवस्था में अटूट विश्वास रखता है। इस पर जिस किसी को भी संदेह है, वह आर्य समाज की शास्त्रार्थ की चुनौती को स्वीकार करे। मनु का सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक चिंतन जितना उनके काल में प्रासंगिक था उतना ही आज भी है और तब तक रहेगा जब तक यह मानव सृष्टि है। ऐसे महामानव के चिंतन पर उंगली वही उठा सकता है, जिसका बौद्धिक दिवाला निकल चुका हो। जबकि भारत बौद्धिक दिवालियेपन का नहीं बल्कि बौद्धिक समृद्धि से भरपूर देश है।आर्य समाज की यह भी मान्यता है कि आरक्षण की जातिगत व्यवस्था समाप्त होनी चाहिए। इसके स्थान पर आर्थिक आधार पर संरक्षण ( आरक्षण नहीं ) दिया जाना प्राकृतिक नियमों के अनुकूल है। बैठक में श्री देवेंद्र सिंह आर्य, मैनेजर जगत नागर, सरपंच रामेश्वर सिंह, देव मुनि जी महाराज, रंगीलाल आर्य, चमन शास्त्री, राजेंद्र सिंह आर्य,विजेंद्र सिंह आर्य, गजराज सिंह आर्य,बलबीर सिंह आर्य , मंत्री धर्मवीर आर्य, आचार्य दशरथ कुमार, बाबूराम आर्य, हर स्वरूप आर्य, कैलाश आर्य, जीतराम आर्य , सुभाष शर्मा, देवदत्त शर्मा, राकेश यादव आदि आर्य जन उपस्थित थे।
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