भारतीय जन महासभा अध्यक्ष धर्म चंद्र पोद्दार ने अधिवक्ता राज कुमार शर्मा को भेंट की पुस्तक ‘सुबह कब होगी?’

रांची। भारतीय जन महासभा के अध्यक्ष धर्म चंद्र पोद्दार ने रविवार को रांची में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देवघर जिला मारवाड़ी सम्मेलन के महासचिव एवं अधिवक्ता श्री राज कुमार शर्मा को अपनी चर्चित पुस्तक ‘सुबह कब होगी?’ भेंट की। पुस्तक भेंट करने का यह अवसर साहित्य, सामाजिक चिंतन और जनजागरण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहा।
इस अवसर पर धर्म चंद्र पोद्दार ने कहा कि पुस्तकें केवल ज्ञान का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि वे समाज के सामने उपस्थित प्रश्नों, चुनौतियों और संभावनाओं को समझने तथा उनके समाधान की दिशा में चिंतन को प्रेरित करने का कार्य भी करती हैं। ‘सुबह कब होगी?’ शीर्षक अपने आप में वर्तमान सामाजिक एवं राष्ट्रीय परिस्थितियों पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए जागरूकता, संवाद और वैचारिक प्रतिबद्धता आवश्यक है तथा साहित्य इन तीनों को मजबूत आधार प्रदान करता है।
पुस्तक प्राप्त करते हुए अधिवक्ता राज कुमार शर्मा ने धर्म चंद्र पोद्दार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसके विचार, संस्कार और जागरूक नागरिकों में निहित होती है। समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को लेखन के माध्यम से सामने लाना निश्चित रूप से एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने पुस्तक के प्रति रुचि व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी कृतियां पाठकों को केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि विषयों पर गंभीरता से सोचने के लिए भी प्रेरित करती हैं।
धर्म चंद्र पोद्दार लंबे समय से सामाजिक एवं राष्ट्रीय विषयों पर अपने विचारों को विभिन्न माध्यमों से व्यक्त करते रहे हैं। उनकी पुस्तक ‘सुबह कब होगी?’ भी इसी वैचारिक यात्रा का एक हिस्सा मानी जा रही है। पुस्तक के माध्यम से सामाजिक परिस्थितियों, व्यवस्था, नागरिक दायित्व और राष्ट्रहित से जुड़े विभिन्न प्रश्नों पर पाठकों का ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास किया गया है। पुस्तक का शीर्षक ही इस बात का संकेत देता है कि लेखक वर्तमान परिस्थितियों से आगे निकलकर एक बेहतर और जागरूक समाज की स्थापना की आकांक्षा रखता है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों के बीच पुस्तक और उसमें निहित विचारों को लेकर चर्चा भी हुई। उपस्थितजनों ने कहा कि आज के दौर में जब समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों से गुजर रहा है, तब वैचारिक एवं साहित्यिक अभिव्यक्ति का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। समाज को दिशा देने वाले प्रश्नों पर स्वस्थ विमर्श और जागरूकता लोकतांत्रिक एवं सामाजिक जीवन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर बिमल पोद्दार एवं सांवर लाल शर्मा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का वातावरण आत्मीय एवं विचारपूर्ण रहा। पुस्तक भेंट करने के इस अवसर को उपस्थित लोगों ने साहित्य और सामाजिक चेतना के बीच संवाद स्थापित करने वाला महत्वपूर्ण क्षण बताया।‘सुबह कब होगी?’ पुस्तक का नाम अपने आप में एक प्रश्न है—और यही प्रश्न पाठक को भीतर तक सोचने के लिए विवश करता है। यह केवल किसी एक व्यक्ति की जिज्ञासा नहीं, बल्कि उस सामूहिक आकांक्षा का प्रतीक है जिसमें समाज जागरूकता, सकारात्मक परिवर्तन, न्याय, नैतिकता और राष्ट्रहित की दिशा में आगे बढ़ने की अपेक्षा करता है। रांची में आयोजित इस कार्यक्रम में पुस्तक का भेंट किया जाना इसी वैचारिक संवाद की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा गया।
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