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आधुनिक समाज की विडंबनाओं को उद्घाटित करता है नाटक “आधी रात के बाद”

आधुनिक समाज की विडंबनाओं को उद्घाटित करता है नाटक “आधी रात के बाद”

  • साहित्य सम्मेलन के मंच पर चाइल्ड केयर के कलाकारों ने दी प्रस्तुति

पटना, २० अगस्त । डा शंकर शेष द्वारा लिखित और डा इन्दु पांडेय द्वारा निर्देशित नाटक “आधी रात के बाद” में आधुनिक समाज की विसंगतियां, भ्रष्टाचार और नैतिक-पतन की पराकाष्ठा सामने आती है।
“चाइल्ड केयर” के तत्वावधान में बुधवार की संध्या बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के मंच पर मंचित हुए इस नाटक में कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों को अंत तक बाँधे रखा । नाटक “आधी रात के बाद” केवल समय को ही इंगित नहीं करता, वह यह भी दिखाता है कि गहरे अंधकार के पीछे होने अथवा किए जाने वाले काले कर्म के पीछे समाज की कौन सी मानसिकता कार्य करती है। इस नाटक का मुख्य पात्र एक चोर है, जो एक जज के घर पर न केवल चोरी करने का साहस करता है, बल्कि जज के साथ संवाद करता हुआ, समाज के अनेक दोषों को भी उजागर करता है।
चोर की भूमिका में आशीष राज, जज की भूमिका में सत्य प्रकाश और रिपोर्टर की भूमिका में निर्मला सिंह के अभिनय को खूब सराहना मिली। रूप सज्जा गुंजा सिंह की थी।
नाटक के प्रथम दर्शक और साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने नाटक का उद्घाटन किया ।

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