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बातें क्या होती है

बातें क्या होती है

संजय जैन

मोहब्बत क्या बला होती है।
जब किसी से होती है।
तो रातों की नींद उड़ती है।
दिन का सुकुन छीनती है।।


आँखों ओंठों से रस पिलाती है।
दिलमें कंपन को बढ़ती है।
जो दिन रात तड़पती है।
मोहब्बत का एहसास करती है।।


साँसों की आहट से वो
दिलकी धड़कने बढ़ती है।
अपना प्यार बरसाती है।
फिर जन्नत दिखती है।।


फूलों की तरह महकती है।
कमल की तरह खिलती है।
खुद का एहसास करती है।
मोहब्बत का दीप जलाती है।।


अब आँखों की जगह ये।
जुवा से बोलने लगती है।
हाल-ए दिलका राज भी।
अब ये खोलने लगती है।।


दिलकी पीड़ा को लिखती है।
अपना हाल बताती है।
हाल तुम्हारा पूछती है।
मिलने की चाह करती है।।


दिलकी बातों का कुछ तो।
तुम अपना इजहार करों।
दिलमें अगर प्यार है तो।
कहने का साहस करों।।


कितना प्यार किया मैंने
तब से लेकर आज तक।
पर क्या ये इतिहास के
पन्नों में ही जीवित रहेगा..।
या जमाने के साथ यारों
वर्तमान में भी मीट जायेगा।।


जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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