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75% अनुदान पर किसानों को मिलेंगे फेरोमोन, स्टिकी और फ्रूट फ्लाई ट्रैप, फसल सुरक्षा के साथ बढ़ेगी उत्पादकता

75% अनुदान पर किसानों को मिलेंगे फेरोमोन, स्टिकी और फ्रूट फ्लाई ट्रैप, फसल सुरक्षा के साथ बढ़ेगी उत्पादकता

  • पौधा संरक्षण उपादान वितरण योजना को मिली स्वीकृति, रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता घटाने की पहल

पटना, 25 अगस्त 2026। बिहार सरकार ने किसानों को हानिकारक कीटों से फसलों की सुरक्षा प्रदान करने, उत्पादन लागत को नियंत्रित करने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कृषि विभाग द्वारा पौधा संरक्षण उपादान वितरण योजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस योजना के तहत किसानों को आधुनिक, प्रभावी और पर्यावरण अनुकूल कीट प्रबंधन तकनीकों से जुड़े उपकरण अनुदानित दर पर उपलब्ध कराए जाएंगे।

कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि योजना के अंतर्गत राज्य के सभी जिलों में क्लस्टर आधारित व्यवस्था के माध्यम से किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान पर फेरोमोन ट्रैप, स्टिकी ट्रैप एवं फ्रूट फ्लाई ट्रैप उपलब्ध कराए जाएंगे। इन तकनीकों के माध्यम से फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले विभिन्न प्रकार के कीटों का प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा।

विभिन्न फसलों में होगा ट्रैप तकनीक का उपयोग

कृषि मंत्री ने कहा कि आधुनिक पौधा संरक्षण तकनीकों का उपयोग बैंगन, धान, मक्का, टमाटर, विभिन्न सब्जियों, अमरूद सहित अनेक फसलों में किया जा सकेगा। इससे किसानों को फसलों पर लगने वाले कीटों की पहचान और नियंत्रण में सहायता मिलेगी तथा कीटनाशकों के अनावश्यक इस्तेमाल को कम किया जा सकेगा।

योजना के तहत अलग-अलग फसलों और कीटों के नियंत्रण के लिए अलग-अलग दर से अनुदान का प्रावधान किया गया है। चना फली छेदक, बैंगन तना एवं फल छेदक तथा धान तना छेदक के नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप पर 96 रुपये प्रति सेट अथवा अधिकतम 480 रुपये प्रति एकड़ की दर से अनुदान दिया जाएगा।

इसी प्रकार मक्का में फॉल आर्मीवर्म के प्रबंधन के लिए फेरोमोन ट्रैप पर 162 रुपये प्रति सेट अथवा अधिकतम 810 रुपये प्रति एकड़ की दर से अनुदान का प्रावधान किया गया है। वहीं सब्जी फसलों में डायमंड बैक मॉथ जैसे हानिकारक कीटों के नियंत्रण के लिए 171 रुपये प्रति सेट अथवा अधिकतम 855 रुपये प्रति एकड़ की दर से अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।

समेकित कीट प्रबंधन को मिलेगा बढ़ावा


कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि पौधा संरक्षण उपादान वितरण योजना का उद्देश्य केवल कीटों को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि किसानों को समेकित कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management) की आधुनिक अवधारणा से जोड़ना भी है। फेरोमोन ट्रैप, स्टिकी ट्रैप और फ्रूट फ्लाई ट्रैप जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों की संख्या को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

फेरोमोन ट्रैप विशेष प्रकार के कीटों को आकर्षित कर उनकी निगरानी एवं नियंत्रण में उपयोगी होते हैं। वहीं स्टिकी ट्रैप के माध्यम से उड़ने वाले कीटों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। फ्रूट फ्लाई ट्रैप फल एवं सब्जी फसलों में नुकसान पहुंचाने वाली फल मक्खियों के प्रबंधन में उपयोगी तकनीक है। इन उपायों को अपनाकर किसान आवश्यकता के अनुसार ही रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग कर सकेंगे।

रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता होगी कम


कृषि मंत्री ने कहा कि अत्यधिक और अनियंत्रित रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग से खेती की लागत बढ़ने के साथ-साथ मिट्टी, जल, पर्यावरण और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में जैविक एवं पर्यावरण अनुकूल उपायों के साथ आधुनिक कीट प्रबंधन तकनीकों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि ट्रैप आधारित कीट प्रबंधन से किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक और अपेक्षाकृत सुरक्षित उपाय उपलब्ध होंगे। इससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी और किसानों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकेगा।

किसानों की उत्पादन लागत घटाने पर जोर

श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं में किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ उनकी उत्पादन लागत कम करना, फसल की सुरक्षा सुनिश्चित करना और प्रति इकाई क्षेत्र उत्पादकता बढ़ाना शामिल है। इसके लिए कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है और उन्हें किसानों के खेतों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

पौधा संरक्षण उपादान वितरण योजना के माध्यम से किसानों को अनुदानित दर पर आधुनिक उपकरण उपलब्ध होने से छोटे और सीमांत किसानों को भी इन तकनीकों का लाभ लेने का अवसर मिलेगा। क्लस्टर आधारित व्यवस्था से एक क्षेत्र में किसानों को संगठित तरीके से पौधा संरक्षण उपायों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा।

सुरक्षित खेती और बेहतर कृषि आय की दिशा में पहल

कृषि मंत्री ने कहा कि स्वस्थ फसल ही बेहतर कृषि उत्पादन और बेहतर आय का आधार है। कीटों के कारण किसानों को हर वर्ष फसल नुकसान का सामना करना पड़ता है। समय रहते कीटों की निगरानी और उनका प्रभावी नियंत्रण करने से फसल क्षति को कम किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार का लक्ष्य है कि आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल पौधा संरक्षण तकनीकों का अधिकाधिक किसानों तक विस्तार किया जाए। किसानों को इन तकनीकों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उनके उपयोग के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।उन्होंने कहा कि सुरक्षित खेती, स्वस्थ फसल, कम उत्पादन लागत और बेहतर कृषि आय के लक्ष्य को हासिल करने में पौधा संरक्षण उपादान वितरण योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सरकार की कोशिश है कि आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ राज्य के अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचे और बिहार की कृषि व्यवस्था को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित एवं लाभकारी बनाया जा सके।

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