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भारत भूषण तिवारी हत्याकांड की न्यायिक जांच आयोग से इंसाफ मिलना असंभव आयोग के अध्यक्ष षड्यंत्रकारी अधिकारियों के साथ मृतक के गाँव गए इसलिए इनकी विश्वसनीयता संदिग्ध है I

भारत भूषण तिवारी हत्याकांड की न्यायिक जांच आयोग से इंसाफ मिलना असंभव आयोग के अध्यक्ष षड्यंत्रकारी अधिकारियों के साथ मृतक के गाँव गए इसलिए इनकी विश्वसनीयता संदिग्ध है I

रमेश कुमार चौबे, महासचिव, नागरिक अधिकार मंच

नागरिक अधिकार मंच के महासचिव सह पत्रकार रमेश कुमार चौबे ने भोजपुर जिला के शाहपुर थाना अंतर्गत बेलौटी गाँव के सामाजिक कार्यकर्ता भारत भूषण तिवारी की मृत्यु की जांच के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर बेहद हीं गंभीर प्रश्न उठाए हैं I
रमेश कुमार चौबे ने सुस्पष्ट रूप से कहा है कि जाँच आयोग के अध्यक्ष का जिला के आला अधिकारियों के साथ मृतक के घर जाना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है I जाँच आयोग के अध्यक्ष को स्वयं जाना चाहिए था I उन्होंने आरोप लगाया कि जिस आयोग का गठन सत्य को सामने लाने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के उद्देश्य से किया गया है, उसकी कार्यप्रणाली प्रारंभ से ही संदेह के घेरे में दिखाई दे रही है I
रमेश कुमार चौबे ने कहा है कि मृतक के घर दिनांक 24/06/26 को भोजपुर पुलिस अधीक्षक आख़िरकार किस मकसद से पुलिस दल बल के साथ गए थे जबकि इन्हीं के नेतृत्व में हत्याकांड को अंजाम दिया गया है I इनकी जब से भोजपुर पुलिस कप्तान के रूप में हुई है इनके कार्यकाल के तमाम मर्डर ,संदिग्ध मृत्यु एवं इनकाउंटर की जाँच होनी चाहिए I इनके मोबाईल और सरकारी फोन का सी.डी.आर निकलकर देखा जाय कि इनको किन किन अधिकारियों का निर्देश मिला था जिससे भारत भूषण तिवारी की पुलिस द्वारा हत्या करने का आदेश हुआ I

रमेश कुमार चौबे ने कहा कि यदि जांच आयोग के अध्यक्ष या सदस्य ऐसे व्यक्तियों के साथ घटनास्थल अथवा मृतक के गांव का दौरा करते हैं, जिन पर स्वयं इस मामले में संलिप्तता के आरोप लगाए जा रहे हैं, तो इससे जांच की निष्पक्षता पर स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़े होते हैं I उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पीड़ित परिवार और आम जनता का आयोग पर विश्वास कमजोर पड़ता है तथा निष्पक्ष जांच की संभावना प्रभावित होती है I

उन्होंने आरोप लगाया कि भारत भूषण तिवारी का मामला केवल एक सामान्य आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि इसकी गहराई से और स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच की आवश्यकता है I उनके अनुसार भारत भूषण तिवारी लंबे समय से जनहित और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे थे I वे दलितों, पिछड़ों तथा समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए सक्रिय रूप से संघर्ष कर रहे थे और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे I

रमेश कुमार चौबे ने कहा कि जमइनिया पंचायत और आसपास के क्षेत्रों में विकास योजनाओं के लिए पिछले वर्षों में खर्च की गई सरकारी राशि के उपयोग को लेकर भारत भूषण तिवारी लगातार सवाल उठा रहे थे I उनका आरोप है कि विभिन्न विकास योजनाओं में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुईं, जिनसे संबंधित कई दस्तावेज और सूचनाएं भारत भूषण तिवारी के पास थीं। उन्होंने दावा किया कि इन्हीं तथ्यों को सार्वजनिक करने और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर होने के कारण उन्हें निशाना बनाया गयाI

नागरिक अधिकार मंच के महासचिव सह पत्रकार रमेश कुमार चौबे ने यह भी कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए केवल औपचारिक जांच पर्याप्त नहीं होगीI उन्होंने मांग की कि पूरे घटनाक्रम की जांच किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए ताकि सभी तथ्यों का खुलासा हो सके और यदि किसी भी स्तर पर प्रशासनिक, राजनीतिक अथवा अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी कार्रवाई सुनिश्चित हो I

उन्होंने भारत सरकार और बिहार सरकार से मांग की कि जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं I साथ ही उन्होंने कहा कि यदि जांच आयोग की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठते रहे तो राज्य सरकार को आयोग के गठन और उसकी कार्यप्रणाली की भी समीक्षा करनी चाहिए I रमेश कुमार चौबे ने बिहार सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य सरकार लीपापोती की नियत से और मामले को लेकर जन आक्रोश को त्वरित शांति के लिए लीपापोती आयोग वैसे रिटायर्ड न्यायाधीश की अध्यक्षता में किया है जिनकी भूमिका प्रथम दिन से हीं संदिग्ध हो गया है इसलिए इनसे न्याय की उम्मीद बेमानी है I

रमेश कुमार चौबे ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनहित के मुद्दे उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा राज्य की जिम्मेदारी है I यदि ऐसे लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु होती है और जांच पर भी सवाल खड़े होते हैं, तो यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए गंभीर चिंता का विषय है I रमेश कुमार चौबे ने कहा है कि भ्रष्टाचारी दुराचारी और अत्याचारी अधिकारी सामाजिक कार्यकर्ताओं की इसलिए षड़यंत्र पूर्वक हत्या करा देते है कि उनका भ्रष्टाचार उजागर नहीं हो सके I

उन्होंने अंत में कहा कि नागरिक अधिकार मंच भारत भूषण तिवारी प्रकरण में निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग को लेकर अपना संघर्ष जारी रखेगा तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर लोकतांत्रिक मंच पर आवाज उठाएगा I रमेश कुमार चौबे ने कहा है कि उन्होंने भी कई भ्रष्टाचार से संबंधित जनहित के मुद्दे उठाये हैं और आगे भी निर्भीकता से उठाते रहेंगे I
 यह लेखक के अपने विचार हैं|

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