Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

"अंतस का महासंगीत"

"अंतस का महासंगीत"

पंकज शर्मा
​शिखर से गिरना, पतन नहीं है,
यह तो पावन, समर्पण-क्षण है।
त्याग कर गौरव, पाषाणों का,
धरा की गोदी में, विसर्जन है।

​शांत सरिता में, बहते जाना,
सहज जीवन का, स्वीकार भाव है।
बिना प्रतिरोधी, लहर बने ही,
परम धारा से, एकात्म भाव है।

​तिमिर को चीरती, सूर्य-रश्मियाँ,
सृष्टि का सनातन, शाश्वत सत्य हैं।
चेतना की इस, विमल आभा में,
सारे भ्रम होते, स्वतः विनष्ट हैं।

​थमा देता है, यह भव्य दृश्य,
चंचल चित्त के, व्याकुल स्पंदन।
मौन होकर ही, सुन पाता जीव,
अपने भीतर का, मधुर गुंजन।

​मिट रही दूरी, अंश-अंशी की,
व्यष्टि का समष्टि में, विलय महान है।
बूँद का सागर से, मिलन हो रहा,
यही तो प्रकृति का, उत्सव-गान है।

​शांत अंतस में, गूँजता संगीत,
सिखाता हमको, सहज जीना।
छोड़ सब संशय, जगत के 'कमल',
सत्य के रस को, अखंड पीना।


. स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित
✍️"कमल की कलम से"✍️
 (शब्दों की अस्मिता का अनुष्ठान)
 
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ