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"व्यर्थ नहीं जाएगी कुर्बानी"

"व्यर्थ नहीं जाएगी कुर्बानी"

रचना - डॉ. रवि शंकर मिश्र "राकेश"
भरत तिवारी! तेरी गाथा,
युगों-युगों तक गाई जाएगी,
अन्यायों के विरुद्ध उठी हर,
आवाज़ में दोहराई जाएगी।


जब तक सूरज-चाँद रहेगा,
संघर्षों का मान रहेगा,
सत्य और स्वाभिमान के पथ पर,
तेरा अमर अभियान रहेगा।


उठो युवाओ! शपथ ये लो,
सत्य-पथ से न डिगना है,
अन्यायों की हर दीवार से,
डटकर आगे भिड़ना है।


मत समझो खामोशी को तुम,
जनता की लाचारी है,
जब-जब सीमा लाँघी जाती,
तब क्रांति भी ज़रूरी है।


कलम उठेगी, स्वर उठेगा,
जन-जन का सम्मान उठेगा,
एक नहीं, हर भरत भूषण में,
फिर से भगत सिंह जन्मेगा।


तेरे सपनों की हर चिंगारी,
जनमन में अंगार बनेगी,
अन्यायों से लड़ने वालों की,
ढाल और तलवार बनेगी।


नमन तुम्हें हे वीर सपूत!
यह जनता भूल न पाएगी,
तेरे संघर्षों की गाथा, व्यर्थ कभी न जाएगी।
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