Advertisment1

यह एक धर्मिक और राष्ट्रवादी पत्रिका है जो पाठको के आपसी सहयोग के द्वारा प्रकाशित किया जाता है अपना सहयोग हमारे इस खाते में जमा करने का कष्ट करें | आप का छोटा सहयोग भी हमारे लिए लाखों के बराबर होगा |

"रुख बदलती दिशाओं के बीच"

"रुख बदलती दिशाओं के बीच"

पंकज शर्मा
कभी मैं अपने ही भीतर
एक अनाम छाया था।
दृष्टियाँ मुझसे गुजरती थीं,
जैसे कोई पथिक
अनदेखे पथ से गुजर जाए।


तब मैं भी अनभिज्ञ था
अपने ही विस्तार से।
न जानता था कि भीतर
एक नील गगन सोया है,
और एक सूर्य जागना शेष है।


फिर समझ में आया—
हवाएँ किसी की नहीं होतीं।
वे केवल दिशा बदलती हैं,
और दिशा का परिवर्तन ही
समय का परिचय है।


जो कल शिखर पर था,
वह भी एक यात्री था।
जो आज ऊँचाई पर है,
वह भी प्रवाह में है।
न ठहराव सत्य है,
न उत्कर्ष अंतिम।


अब पहचान का अर्थ
घोषणाओं में नहीं मिलता।
वह उस दीप-सा है
जो एकांत में जलकर भी
अपने होने को सिद्ध करता है।


लोग बदल गए हैं,
या उनकी दृष्टि बदली है—
मैं नहीं जानता।
मैं केवल इतना जानता हूँ,
समय के प्रत्येक मोड़ पर
स्वयं से मिलना शेष रहता है।


इसलिए अब न हर्ष अधिक है,
न विषाद का आग्रह।
मैं बदलती दिशाओं के बीच
एक शांत प्रश्न बना हूँ—
जहाँ हर उपलब्धि के पार
फिर एक नई यात्रा आरंभ होती है।


. स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित
✍️ "कमल की कलम से"✍️ (शब्दों की अस्मिता का अनुष्ठान)
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे फेसबुक पेज से जुड़े https://www.facebook.com/divyarashmimag हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews हमें ट्विटर पर फॉलो करे :- https://x.com/DivyaRashmi8

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ